मान्धाता PHC के अधीक्षक अभिषेक पटेल की मनमानी से जनता परेशान, स्वास्थ्य सेवाओं की खुली पोल | New India Times

दयाशंकर पांडेय, ब्यूरो चीफ, प्रतापगढ़ (यूपी), NIT:

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एक तरफ जहां सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने का दावा कर रही है और इसके लिए करोड़ों का बजट खर्च कर रही है, वहीं दूसरी तरफ मान्धाता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में तैनात अधीक्षक अभिषेक पटेल पर गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, उन्हें यहाँ कार्य करते हुए लगभग 4 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन इस दौरान किसी भी PHC या CHC में पुताई–रंगाई, मरम्मत या रखरखाव का कार्य नहीं हुआ। जनरेटर बिना आवश्यकता के लगातार चलाया जाता है।कागज़ों में सब कुछ ठीक दिखाया जाता है, जबकि शौचालयों की स्थिति बेहद खराब है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।

इनकी देखरेख में चल रहे कई स्वास्थ्य केंद्रों में अव्यवस्थाओं का अंबार

अधीक्षक की देखरेख में —

• पर्वतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र,

• कटरा गुलाब सिंह अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र,

• विश्वनाथगंज PHC,

• छितपालगढ़ स्वास्थ्य केंद्र,

• और कई आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हैं।

सूत्र बताते हैं कि सभी केंद्रों पर जमीनी हालात बेहद खराब हैं और स्वास्थ्य सेवाएँ अव्यवस्थित है।

डॉक्टरों से कथित रूप से वसूली, मनमानी से आने–जाने का आरोप

सूत्रों के मुताबिक, इन स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टर मनमाने समय पर आते–जाते हैं।
सबसे गंभीर आरोप ये है कि अधीक्षक अभिषेक पटेल डॉक्टरों से मोटी रकम वसूलते हैं, जिसके कारण कई डॉक्टर केंद्रों पर रहते ही नहीं।
इसके चलते आम जनता को सही समय पर उपचार नहीं मिल पाता।

नर्सों और आशा बहुओं से भी धन उगाही का आरोप

सूत्रों के अनुसार, अधीक्षक द्वारा नर्सों और आशा कार्यकर्ताओं से भी अवैध वसूली की जाती है।
इससे कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है।

सरकार लाखों रुपए देती है, पर जमीनी स्थिति जर्जर

सरकार रोगी कल्याण समिति (RKS) के माध्यम से अस्पतालों के रखरखाव हेतु लाखों रुपए का बजट देती है।
लेकिन हालात यह हैं कि—

• किसी भी स्वास्थ्य केंद्र पर पुताई नहीं हुई,

• जनता के बैठने की उचित व्यवस्था नहीं,

• साफ–सफाई और मूलभूत सुविधाएँ बदहाल हैं।

यह सब सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता है।

अधीक्षक के कथित बयान भी विवादों में

कई सालों से PHC संभाल रहे अभिषेक पटेल कथित तौर पर कहते सुने जाते हैं कि —
“जिले के अफसरों को पैसा देकर मैं इस कुर्सी पर बैठा हूं… मेरे विधायक–सांसद मेरे हैं… पत्रकार चाहे जितनी खबर चला लें, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।”
ऐसे बयान प्रशासनिक व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े करते हैं।

क्या जनता की बुनियादी सुविधाएँ इसी तरह लुटती रहेंगी?

जब सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में इतनी गंभीर है, तब अधीक्षक स्तर पर इस तरह की मनमानी और भ्रष्टाचार जनता के अधिकारों पर सीधा प्रहार है।
अब सवाल यह है कि क्या अधीक्षक अभिषेक पटेल की मनमानी यूँ ही जारी रहेगी और जनता बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं से वंचित होती रहेगी?

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