साबिर खान, गुरुग्राम/नई दिल्ली, NIT:

हरियाणा पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। भीमसेना सुप्रीमो नवाब सतपाल तंवर को मिली जान से मारने की धमकी के मामले में गुरुग्राम पुलिस के जांच अधिकारी एएसआई दिनेश कुमार द्वारा भेजे गए नोटिस सोशल मीडिया पर मज़ाक का विषय बने हुए हैं। कारण, नोटिस की तारीखें ऐसी हैं कि शिकायतकर्ता को ‘भूतकाल’ में जाकर हाजिर होना पड़े!
12 नवंबर को सतपाल तंवर को अनमोल बिश्नोई के नाम से व्हाट्सएप पर जान से मारने की धमकी मिली थी। तंवर की ओर से स्क्रीनशॉट सहित शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन जांच अधिकारी ने दोबारा वही स्क्रीनशॉट मांगे और फिर ग़लत तारीखों वाले अजीबोगरीब नोटिस जारी कर दिए।
21 नवंबर को दो नोटिस व्हाट्सएप से भेजे गए—पहला 15 नवंबर की तारीख का, जिसमें 21 नवंबर सुबह 10 बजे थाने में हाजिर होने का आदेश, जबकि दूसरा 21 नवंबर के ही दिनांक वाला, जिसमें अगले दिन 22 नवंबर को पेश होने की बात कही गई। दोनों नोटिस एक ही समय पर भेजे गए, और पहला नोटिस तो भेजने के समय से पहले की तारीख का था।

भीमसेना की मुख्य सचिव नेहा शर्मा ने नोटिस में दिए विकल्प के अनुसार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बयान दर्ज करने की अनुमति मांगी, लेकिन जवाब नहीं मिला। फिर 23 नवंबर को ईमेल से एक और नोटिस आया—जिसमें उसी दिन सुबह 11 बजे उपस्थित होने का आदेश था, जबकि नोटिस दोपहर में भेजा गया। इसे लेकर सोशल मीडिया पर ‘टाइम ट्रैवल नोटिस’ ट्रेंड करने लगा।
नेहा शर्मा ने अपने जवाबी पत्र में तीखे शब्दों में कहा—
“सॉरी सर, टाइम ट्रैवल इज़ नॉट पॉसिबल। यदि बयान लेना है तो नवाब सतपाल तंवर के निवास पर आकर लें।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि “हमारा ऑफिस कहां है, यह बताना हमारा संवैधानिक प्राइवेसी अधिकार है। असली सवाल यह होना चाहिए कि धमकी किस स्थान से भेजी गई।”
उन्होंने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी बचकाने सवाल पूछ रहे हैं और यदि उन्हें जांच में रुचि नहीं है, तो मामला क्राइम ब्रांच को सौंप दिया जाए।
इस विचित्र कार्रवाई ने हरियाणा पुलिस की छवि को धक्का पहुंचाया है। उच्च अधिकारियों के अपराध नियंत्रण प्रयासों पर भी इस तरह की लापरवाही प्रश्नचिह्न लगा रही है। विभाग की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक पूरे मामले की विभागीय जांच संभव है और एएसआई दिनेश कुमार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

