मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

आल इंडिया हज वेलफेयर सोसाइटी के मीडिया प्रभारी आसिफ़ रईस साहब ने बताया कि आल इंडिया हज वेलफेयर सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकीत खान खंडवा ने भारत सरकार, केंद्रीय हज मंत्रालय, नई दिल्ली के जिम्मेदारों से मांग की है कि हज कमेटी ऑफ़ इंडिया के माध्यम से मुक़द्दस सफ़र ए हज पर जाने वाले यात्रियों को प्रस्थान के वक्त एयरपोर्ट के भीतर मिलने वाली फॉरेन एक्सचेंज (सऊदी रियाल) की रकम को पुनः शुरू की जाए।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 के पहले तक प्रति हज यात्री को 2100/- सऊदी रियाल दिए जाते थे जिससे हज यात्रियों को काफ़ी सुविधा होती थी, नैशनल चेयरमैन जनाब मुकीत खान ने बताया कि पहले हज कमेटी के माध्यम से जाने वाले हज यात्रियों को अपनी कुल रकम में फॉरेन एक्सचेंज की रकम भी मिलाकर हज कमेटी को जमा कराना होती थी, हज यात्रियों को यह रकम हज पर रवाना होने से पहले एयरपोर्ट के भीतर बने काउंटर से दे दी जाती थी।
साल 2023 में फॉरेन एक्सचेंज की रकम दिए जाने की प्रथा एकदम से खत्म कर दी गई जिससे हज यात्रियों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया था, व्यवस्था गड़बड़ाने से आज तक इसका असर और प्रभाव देखा जा सकता है। राष्ट्रीय महासचिव सैय्यद रियाज़ (धार) ने बताया कि यह रियाल हज यात्रियों को सऊदी में खर्च के लिये दिए जाते थे ताकि वहाँ जाकर वे करंसी बदलवाने के चक्कर मे पड़ अपना समय ना गवाएं।
साथ ही बहुत से हज यात्री ग्रामीण क्षेत्रों से भी जाते हैं जिन्हें करंसी की कोई जानकारी नही होती। हज कमेटी ऑफ़ इंडिया मुंबई का सऊदी रियाल देने का नियम काफी कारगर और जन हितैषी साबित होता रहा है, यही नही प्राइवेट टूर्स के माध्यम से हज पर जाने वाले यात्रियों को भी भारतीय मुद्रा के बदले सऊदी रियाल, टूर ऑपरेटर्स उपलब्ध कराते हैं।
हाजियों के लिए देश में सबसे बड़े नेटवर्क के रूप में कार्यरत संस्था ऑल इंडिया हज वेलफेयर सोसायटी ने केंद्रीय हज कमेटी मुंबई से रियाल उपलब्ध कराने की पुरानी व्यवस्था को भारतीय हाजियों के व्यापक हित में दोबारा शुरू किये जाने की मांग की है।
