अंकित तिवारी, ब्यूरो चीफ, प्रयागराज (यूपी), NIT:

इलाहाबाद शहर के पत्थर गिरजा स्थित धरना स्थल पर नागरिक समाज, इलाहाबाद के बैनर तले सोनम वांगचुक की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने सोनम वांगचुक पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) को शर्मनाक और लोकतंत्र विरोधी बताते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि प्रख्यात वैज्ञानिक सोनम वांगचुक ने लद्दाख की अस्मिता और अस्तित्व की रक्षा के लिए आवाज उठाई है।उन्होंने लद्दाख में छठी अनुसूची लागू करने और पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन चलाया, लेकिन केंद्र सरकार ने उनके खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई करते हुए NSA लगा दिया। सभा में वक्ताओं ने कहा कि सोनम वांगचुक का पर्यावरण संरक्षण और विज्ञान के क्षेत्र में योगदान अत्यंत सराहनीय रहा है। वे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं। उनकी देशभक्ति पर कोई प्रश्नचिह्न नहीं लगाया जा सकता, लेकिन मौजूदा सरकार लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रही है और शांतिपूर्ण आंदोलन को भी अपराध की तरह पेश कर रही है।

उन्होंने लद्दाख में छठी अनुसूची लागू करने और पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन चलाया, लेकिन केंद्र सरकार ने उनके खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई करते हुए NSA लगा दिया। सभा में वक्ताओं ने कहा कि सोनम वांगचुक का पर्यावरण संरक्षण और विज्ञान के क्षेत्र में योगदान अत्यंत सराहनीय रहा है। वे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं। उनकी देशभक्ति पर कोई प्रश्नचिह्न नहीं लगाया जा सकता, लेकिन मौजूदा सरकार लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रही है और शांतिपूर्ण आंदोलन को भी अपराध की तरह पेश कर रही है।

धरना स्थल पर हुई सभा में नागरिक समाज, इलाहाबाद के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई की मांग की। साथ ही लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और उसे छठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की भी मांग उठाई गई। सभा में वक्ताओं ने देश में बढ़ती बेरोज़गारी, खेती-किसानी और उद्योग-धंधों पर मंडराते संकट पर भी चिंता जताई तथा जनता से इन मुद्दों पर एकजुट होने की अपील की। विरोध प्रदर्शन में विभिन्न छात्र संगठन, किसान संगठन, मजदूर संगठन, वकील, डॉक्टर और प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
सभा को आनंद मालवीय, सुभाष पांडे, अविनाश मिश्रा, आशीष मित्तल, पद्मा सिंह, ऋषेश्वर उपाध्याय, सिद्धेश्वर जी, राघवेंद्र जी, सीमा आज़ाद, आरती पांडे, राजेश सचान, नसीम अंसारी, कमल उसरी, मनीष कुमार, चित्तजीत मित्रा, असरार अहमद नियाज़ी और चंद्रप्रकाश ने संबोधित किया।
सभा का संचालन अविनाश ने किया।

