सफाई कर्मचारी के सम्मान की आवाज़ उठाने वाली महिला पत्रकार को मानसिक रूप से किया जा रहा है प्रताड़ित | New India Times

अबरार अहमद खान/मुकीज खान, भोपाल (मप्र), NIT:

सच बोलना और दिखाना हर पत्रकार का धर्म होता है, लेकिन जब यही सच ताकतवरों के चेहरे से नकाब उतारता है, तो अक्सर इसकी क़ीमत चुकानी पड़ती है। ऐसा ही एक मामला राजधानी भोपाल से सामने आया है।जहाँ एक महिला पत्रकार को ईमानदारी से की गई रिपोर्टिंग के चलते ना सिर्फ़ धमकियों का सामना करना पड़ रहा है बल्कि मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया जा रहा है।

सफाई कर्मचारी के सम्मान की आवाज़ उठाने वाली महिला पत्रकार को मानसिक रूप से किया जा रहा है प्रताड़ित | New India Times
सफाई कर्मचारी के सम्मान की आवाज़ उठाने वाली महिला पत्रकार को मानसिक रूप से किया जा रहा है प्रताड़ित | New India Times


मामला विजयनगर लालघाटी स्थित साईं बाबा कॉम्प्लेक्स का है, जहां 25 सितंबर 2025 को निवासी प्रकाश मंगलानी ने सफाई कर्मचारी ममता वाल्मीकि के साथ अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज की थी। इस घटना को पत्रकार ममता गनवानी ने निडर होकर उजागर किया था।लेकिन सच्चाई दिखाना ही उनके लिए संकट मोचन बन गया। आप को बता दें कि ख़बर प्रकाशित होने के बाद 26 सितंबर को वाल्मीकि समाज और नगर निगम कर्मचारियों ने प्रकाश मंगलानी से माफी की मांग की थी। बताया जा रहा है कि उमेश श्रीवास्तव ने बीच में आकर वाल्मीकि समाज से दादागिरी कर उलझने की बहुत कोशिश की। लेकिन उनकी एक न चली।वाल्मीकि समाज का आक्रोश बढ़ता देख प्रकाश मंगलानी ने सफाईकर्मी ममता वाल्मिकी से हाथ जोड़ पांव छूकर माफी मांगी, जब जाकर मामला शांत हुआ।

पत्रकार ममता गनवानी ने आरोप लगाते हुए कहा कि 8 अक्टूबर की आधी रात, उमेश श्रीवास्तव और उसके पड़ोसी कपिल पारवानी ने कथित रूप से खुद पार्किंग में अंडा फेंककर मेरे ऊपर झूठा आरोप लगा कर विवाद करने लगे। रात 2:45 बजे जब मामला बढ़ा,तो पत्रकार ने अपने पिता को बुलाकर स्थिति संभाली और उसी वक्त थाना कोहेफिजा पहुंचकर आवेदन दिया। ममता गनवानी का कहना है कि  उमेश श्रीवास्तव पहले भी कार का शीशा तोड़ चुके हैं , जिसकी एफआईआर 18 सितंबर 2023 को दर्ज हो चुकी है। लेकिन इसके बावजूद वह खुलेआम घूम रहे हैं। और पत्रकार को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।

पत्रकार समाज ने इस पूरे प्रकरण पर कड़ा आक्रोश जताया है। ममता गनवानी के समर्थन में कई वरिष्ठ पत्रकार, प्रेस क्लब और मीडिया संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे शरारती तत्वों के खिलाफ फौरन सख्त कार्रवाई की जाए।

पत्रकारों का कहना है कि यदि एक महिला पत्रकार, जो समाज की सच्चाई सामने लाती है, उसे ही इस तरह निशाना बनाया जाएगा, तो यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।

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