बारहवीं का 30% से कम रिजल्ट वाले प्राचार्यों पर एक वेतन वृद्धि प्रभाव से तत्काल रोकने के आदेश से प्राचार्य नाराज़,शिक्षा विभाग पर भेदभाव पूर्ण कार्यवाही करने का प्राचार्यों ने लगाया आरोप | New India Times

इम्तियाज़ चिश्ती, ब्यूरो चीफ, दमोह (मप्र), NIT:

दमोह जिले में बोर्ड परीक्षा के दौरान जिन सरकारी स्कूलों का रिजल्ट 30 प्रतिशत से कम आया था उन प्राचार्या की एक-एक वेतन वृद्धि रोके जाने के आदेश जारी हुए थे लेकिन उसमें भी जिले के जिम्मदारों ने गुंजाइश ढूँढ़ ली । शिक्षा का मज़ाक तो बनाया ही शिक्षकों ने जहाँ बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया उन्हें शिक्षा के अधिकारों से वंचित कर स्कूलों में ठीक पढ़ाई ना कराके उन की साल बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी ऐसे स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के बजाए गाज गिरी स्कूल के प्राचार्यों पर। प्राचार्यों की एक नहीं सुनी गई।
वहीं सागर कमिश्नर ने असंचई प्रभाव से कार्यवाही करते हुए प्राचार्यों की एक वेतन वृद्धि रोक कर तत्काल आर्थिक दण्ड दिया । ऐसे में प्राचार्यों को न्याय के लिए कोर्ट की शरण लेने मजबूर होना पड़ा । प्राचार्यों का लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा वहीं सर्विस बुक में आनन फानन में वेतन वृद्धि रोकने का भी उल्लेख किया गया है ।
हैरान करने वाली बात की कुछ प्राचार्यों को इस पनिशमेंट से मुक्त रखा गया। सवाल उठता है कि अब क्या ऐसे उन अधिकारियों पर भी कोई कार्यवाही होगी जिन्होंने चहेते प्राचार्यों को बचाने का प्रयास किया ।
साल 2024-25 में जिले के 33 ऐसे हाई स्कूल और हायर सेकंडरी स्कूल चिह्नित किए गए। जबकी कुल 7 प्राचार्यों को नोटिस जारी किये गए , लेकिन उनकी वेतनवृद्धि नहीं रोकी गई। बल्कि जिन प्राचार्यों को बख़्शा गया उनकी सर्विस बुक में न तो वेतन वृद्धि रोकने की कोई इंट्री की गई और न ही डीडीओ को वेतन रोकने संबंधी कोई आदेश दिया गया ऐसे में जिला शिक्षा विभाग के मुखिया मौन हैं।
बीते साल से देखने में आ रहा है कि बोर्ड परीक्षा में दमोह का रिजल्ट का स्तर साल दर साल गिरता गया । 2024 कक्षा 10वीं का परीक्षा परिणाम 41 . 39 रहा ।

जिले का खराब रिजल्ट आने पर भी कोई कार्यवाही नहीं

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जिन स्कूलों
का रिजल्ट सबसे खराब रहा उनके प्रभारी प्राचायों की सूचना कमिश्नर कार्यालय भेजी गई। ताकि वहां से नोटिस जारी हो सकें। लेकिन वहां से नोटिस भेजने में भी भेदभाव किया गया 4 प्राचायों को नोटिस तक नहीं भेजे गए जबकी पिछले साल 2024 में भी 30% से कम रिजल्ट देने वाले 9 स्कूल चिह्नित किए गए थे। इनकी वेतनवृद्धि रोकने का आदेश जारी हुआ था, लेकिन इनमें से कम से कम 4 प्राचार्यों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई। इस वर्ष हाई स्कूल परीक्षा में दमोह सबसे अंतिम पायदान पर था दसवी का 53.38 प्रतिशत का जबकि इससे पहले 2022 में कक्षा 10वीं का परीक्षा परिणाम 83.8 था जिसमें दमोह की रेकिंग पहले नंबर पर थी। 2023 में कक्षा 10वीं का परीक्षा परिणाम 68.37 प्रतिशत और ऐसे स्कूलों के प्राचायों पर कार्यवाही होनी थी। जिनका रिजल्ट 30 प्रतिशत या इससे कम था। इन स्कूलों के प्राचायों के खिलाफ विभागीय कारवाई होना थी, लेकिन किसी पर कार्रवाई हुई तो किसी किसी को छोड़ दिया गया । विश्वसनीय सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि जिन प्राचार्यों पर एक तरफा कार्यवाही की गई है अब वे हाई कोर्ट में न्याय की गुहार लगाने पहुंच गए हैं उनका कहना है कि प्राचार्यों के विरुद्ध इस प्रकार की कार्यवाही तत्काल करना अनुचित है। किसी भी स्कूल का खराब परीक्षा परिणाम आता है तो पहले नोटिस जारी कर जाँच की जाना चाहिए यदि प्राचार्य मात्र दोषी पाया जाए तो कार्यवाही उचित कही जाएगी । क्योंकि प्राचार्य का कार्य हर कक्षा में सभी विषयों को सीधे खुद से पढ़ाना नहीं होता बल्कि शिक्षण कार्य शिक्षकों के द्वारा सही कराया जाए इसकी मानीटरिंग करना होता है। लेकिन एक तरफा कार्यवाही अकेले प्राचार्यों पर कर दी गई वो भी भेदभाव पूर्ण । इससे सभी दण्डित प्राचार्यों में खासी नाराजगी देखी जा है। उनका कहना हैं कि सभी शिक्षक संगठनों के साथ आयोजित बैठक में दमोह कलेक्टर ने एक आदेश जारी कर कहा था कि दूसरे अवसर की परीक्षा हेतु बच्चों के शत प्रतिशत फार्म भरवाएं और फेल बच्चों को दूसरी बार आयोजित परीक्षा में बैठाएं । प्रथम और द्वितीय परीक्षा का परिणार मिला कर परिक्षा परिणाम आने पर कार्यवाही के बारे में निर्णय लिया जाएगा ।
इस आदेश का पालन करते हुए शिक्षको ने दूसरे अवसर बच्चों के फार्म भराए और ग्रीष्म कालीन अवकाश में भी 15 मई से निरंतर 16 जून तक कक्षाएं संचालित की लेकिन दूसरे अवसर का परीक्षा परिणाम आने से पहले ही आला अधिकारियों द्वारा कार्यवाही की गाज गिरा दी गई । सारी छुट्टियाँ भी गईं और कलेक्टर का आदेश भी हवा हवाई साबित हो गया । ऐसी स्थिति में आर्थिक दण्ड झेल रहे प्राचार्य व शिक्षक संघ भेदभाव पूर्ण कार्यवाही के विरुद्ध वेतन वृद्धि रोकने के ताना शाही आदेश को निरस्त कराने और उचित कार्य वाही न करने पर धरना प्रदर्शन करने की योजना बना रहे हैं । अब देखने लायक़ होगा कि जिला प्रशासन इस विषय पर क्या संज्ञान लेता है। वहीं दमोह जिला शिक्षा अधिकारी एस के – नेमा का कहना है कि हमारे यहाँ से सिर्फ लिस्ट बनाकर सागर कमिश्नरी कार्यालय भेज दी गई थी हमने सूची जो भेजी थी उसमें उन सभी स्कूलों के प्राचार्यों के नाम थे अब किन किन को छोड़कर नोटिस जारी हुए यह हमारे यहाँ से कोई संबंध नहीं यह तो उच्चय अधिकारी जानें ।

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