मिट्टी में मिल रही हैं CMGSY PMGSY की घटिया सड़कें : पॉकेट के लिए चुप है ना बार्ड ? | New India Times


नरेन्द्र कुमार ब्यूरो चीफ,जलगांव (महाराष्ट्र)NIT:

मिट्टी में मिल रही हैं CMGSY PMGSY की घटिया सड़कें : पॉकेट के लिए चुप है ना बार्ड ? | New India Times


पाचोरा चालीसगांव भुसावल के ठेकेदारों ने ग्राम विकास मंत्रालय की ओर से जिन सड़कों के टेंडर लिए हैं वह सारी की सारी सड़कें मिट्टी में मिल रही हैं। ग्राम विकास मंत्री रहे गिरीश महाजन के गृह क्षेत्र जामनेर के गांव खेडो में बनी साढ़े तीन मीटर चौड़ी इन सड़कों पर चलकर देखने के बाद सच्चाई पता चलती है ।पिछली रिपोर्ट मे हमने बताया कि कैसे  रातोरात एक गांव से दूसरे गांव को सड़क से जोड़ दिया जा रहा है। गिट्टी बजरी मुरूम डामर पूरा सामग्री थर्ड क्लास दर्जे का इस्तेमाल किया जा रहा है ।बीजेपी ने सूबे को गिरवी रख दिया है तो विश्व बैंक से कर्जा उठाकर नाबार्ड को बली का बकरा बनाकर नेता और उनके चरणदास ठेकेदारो ने लुट मचा रखी है।
पॉकेट के लिए नाबार्ड खामोश : PWD की तरह जिला परिषद के अंतर्गत आने वाले निर्माण विभाग का एक उड़नदस्ता होता है जो वर्क साइड पर जा कर काम का परीक्षण करता है ।नाबार्ड के अधिकारियो द्वारा भी स्वतंत्र रूप से गुणवत्ता जांची जाती है ! जिले मे CMGSY PMGSY के जितने भी काम शुरू है उनपर नाबार्ड का कोई ऑब्जर्वेशन नही है ! ठेकेदार जिला परिषद और नाबार्ड के जांच अधिकारियो को मोटी घुस दे देते है ! दफ्तर के बाबू लोग 2% कमीशन लेकर बैठे बैठे नपाई बुक ( Mesorment Book) भरकर बिल बनाकर वित्त विभाग को पेश कर देते है ! आगे जो अधिकारी बिल पास कराते है उनको 3% और फाइनल बिलिंग के लिए 5% इस तरह से कुल मिलाकर 10% कमीशन मे सब कुछ सेटल कर दिया जाता है। अगली रिपोर्ट मे हम आपको निर्माण सामग्री मे किए जाने वाले मिलावट की जानकारी देने की कोशिश करेंगे ।

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