अबरार अहमद खान/मुकीज खान, भोपाल (मप्र), NIT
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के आह्वान पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने वक्फ़ बोर्ड बिल के खिलाफ भोपाल के सेंट्रल लायब्रेरी ग्राउंड पर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन किया।आप को बता दें कि लोकसभा एवं राज्यसभा से पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी पा चुके वक्फ संशोधन बिल को लेकर मुस्लिम समाज में चिंता और असंतोष का माहौल है। समाज का बड़ा तबका मानता है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों के अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा असर डाल सकता है। विरोध के सुर केवल राजनीतिक नहीं हैं – ये समाज की गहराइयों से उठ रहे हैं।
वक्फ कानून के खिलाफ मुस्लिम समुदाय में जबरदस्त आक्रोश है ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड के मेंबर आरिफ मसूद ने
धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुऐ कहा कि बोर्ड का फैसला देर से होता है, लेकिन सही होता है। शाहबानो केस में जो फैसला लिया था, वह सटीक साबित हुआ है। आज फिर बोर्ड फैसला ले रहा है, और यकीन मानिए, अल्लाह की मदद हम सबके साथ है।आरिफ मसूद का कहना था कि लोगों को वरगलाया जा रहा है कि वक्फ की जमीनें कब्जेदारों से लेकर गरीबों में बांटी जाएंगी। बिल में अगर वाकई यह लिखा हो कि कब्जेदारों से जमीन लेकर गरीबों को दी जाएंगी, तो मैं खुद हिमायत करूंगा। वक्फ की जागीर नवाबों, राजाओं और बादशाहों की नहीं है। इन्हें उन लोगों ने वक्फ के नाम किया है, जिन्हें अल्लाह ने हिदायत दी। कई वक्फ जमीनें खसरों में दर्ज हैं। हम ट्रिब्यूनल से जीत चुके हैं। हाईकोर्ट से भी जीतेंगे।

वहीं जमीअत उलमा के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे हितों को नजरअंदाज करते हुए यह कानून जबरन थोपा जा रहा है। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में ऐसा कभी नहीं हुआ।
हाजी मोहम्मद हारून का कहना था कि वक्फ संशोधन कानून में बुराइयां ही बुराइयां नजर आती हैं। भारत एक लोकतांत्रिक देश है। यहां किसी पर कुछ थोपा नहीं जा सकता। ब्रिटिश सरकार में भी कानून बनाने से पहले संबंधित लोगों से विमर्श किया जाता था, लेकिन आज बिना किसी चर्चा के इतने महत्वपूर्ण बदलाव कर दिए गए।

शहर काजी मुश्ताक अली नदवी ने कहा कि मुसलमानों की लड़ाई किसी धर्म या समुदाय से नहीं है। यह पूरी तरह कानूनी अधिकारों और न्याय व्यवस्था से जुड़ा हुआ मामला है। कुछ लोग इसे धर्म के नाम पर गलतफहमी फैलाकर प्रस्तुत कर रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह मंच केवल ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से संबंधित है और हम उसी की ओर से बोल रहे हैं। काजी साहब ने कहा, “अल्लाह था, है और रहेगा। जो अल्लाह हजरत मूसा और ईसा का था, वही आज भी हमारा है। हमें अल्लाह ने मुसलमान बनाकर पैदा किया है। लेकिन हमारा किसी से कोई झगड़ा नहीं है। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि वे अपने चरित्र और गुणवत्ता (क्वालिटी) को बनाए रखें। साथ ही यह भी कहा कि इस्लाम इंसानियत का पैगाम देता है और पैगम्बर मोहम्मद (स.अ.) इंसानियत की मुकम्मल मिसाल है।
इस मौके पर क़ाज़ी सैयद मुश्ताक अली साहब नदवी क़ाज़ी शहर भोपाल, मौलाना सैयद बाबर हुसैन साहब नदवी नायब क़ाज़ी भोपाल, मौलाना अली कदर साहब नदवी नायब क़ाज़ी भोपाल, मुफ्ती रईस अहमद खान साहब कासमी नायाब मुफ्ती भोपाल, मौलाना शराफत रहमानी साहब नायब क़ाज़ी भोपाल, मौलाना मोहम्मद अहमद खान साहब सदर जमीयत उल्लामा मप्र, जनाब हाजी हारुन खान साहब एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट सादर जमीअत उल उलमा मप्र, जनाब हामिद खान साहब सदर जमात-ई-इस्लामी मप्र, जनाब मौलाना उमर खान साहब जिम्मेदार उलेमा जमाते इस्लामी भोपाल, अहले सुन्नत वल जमात के सदर नूरुद्दीन सक़लैनी साहब,ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मेंबर मौलाना मसीह आलम साहब, मुफ़्ती ज़काउल्लाह शिबली इंदौर एवं भोपाल शहर के बड़ी तादाद में लोग मौजूद रहे।

