नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

महाराष्ट्र में जहां-जहां प्रादेशिक विभागों की सीमाएं आपस में समन्वय स्थापित करती है वहां एक विभाग से दूसरे विभाग में प्रवेश करने वाले शख्स को किसी अलग सूबे में होने की अनुभूति आती है। सीमाओं की जानकारी सबसे पहले लोकनिर्माण विभाग द्वारा खराब सड़कों से दी जाती है। औरंगाबाद विभाग सोयगांव ब्लॉक ज़िला औरंगाबाद में वेताल बाड़ी नाम के एक छोटे से गांव से गुजरने वाले रास्ते को भारी बारिश में बनाया जा रहा है। इस गांव के आगे अजंता पहाड़ियों और घने जंगलों की विस्तृत श्रृंखला है। इसी सड़क से हम टीले पर बने गुमनाम किले की ओर निकले।

जंगल में PWD की ओर से डामर गिट्टी से सड़क मरम्मत का काम शुरू था और उपर से झमाझम बारिश हो रही थी। बारिश में डामर से स्प्रे और गिट्टी की दबाई वाकई में गज़ब का दृश्य है, किसी कारणवश हमने फोटो सेशन करना ठीक नहीं समझा। वेताल बाड़ी किला और उस तक जाने वाली सड़क बुरी तरह से उखड़ चुकी है। टीले पर बसा किला रखरखाव के अभाव से जर्जर हो कर अस्तित्व की अंतिम लड़ाई लड़ रहा है। विश्व धरोहर अजंता गुफाओं के कारण इस ब्लॉक को विशेष फंड का प्रावधान है। ग्रामीणों ने बताया कि साल के 365 दिन इस सड़क को रफू कराया जाता रहता है। रास्ते में पड़ने वाले प्रत्येक गांव मे मंत्री अब्दुल सत्तार की ओर से किए गए विकास को लेकर महान कर्म निष्ठा के सरकारी बोर्ड मिल के पत्थर की तरह नज़र आए पर गुणवत्ता को कार्यकर्ताओं के लालच ने खा लिया। सत्ता से पैसा-पैसों से सत्ता-सत्ता से मालमत्ता, महाराष्ट्र के वो सभी विधानसभा चुनाव क्षेत्र बीते तीस सालों से इसी सर्कल में घूम रहे हैं जहां वर्तमान नेताओं का एकछत्र अमल चल रहा है। एक सच्चाई यह भी है कि मंत्रियों के जात वाले और उनके 20/30 साल के बच्चे NGOs बनाकर सरकारी ठेकों से भ्रष्टाचार के माध्यम से करोड़ों रूपयों की संपत्ति इकठ्ठा कर रहे हैं ED, CBI छुट्टी पर है।

मंत्री जी के कार्यालय को घेरा: लंबित वेतन, 19 महीने का वित्तीय घाटा, 10% आरक्षण और क्लास 4 की नौकरियां भरने की मांग को लेकर ग्राम पंचायत कर्मचारियों ने ग्रामविकास मंत्री गिरीश महाजन के जामनेर स्थित कार्यालय पर मोर्चा निकाला। शिंदे-फडणवीस सरकार ने महाराष्ट्र पब्लिक सेफ्टी बिल पेश किया था जो सौभाग्य से सदन में पास नहीं हुआ है। बहुमत के दम पर भाजपा इस बिल को पास करवा देती तो आज गिरीश महाजन के सहवास केंद्र पर मोर्चा निकालने वाले गरीब जेल में ठूस दिए गए होते। महाजन ने पर्यटन विकास विभाग की तिजोरी से धार्मिक स्थलो को तीन हजार करोड़ रुपए से अधिक का फंड रिलीज किया। ग्राम विकास के कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने वाली अभय यावलकर कमेटी रिपोर्ट को कचरे के डिब्बे मे फेंक दिया है।

