डॉक्टर की लापरवाही से बच्चे की गई जान, हॉस्पिटल हुआ सीज | New India Times

संदीप शुक्ला, ग्वालियर ( मप्र ), NIT; ​डॉक्टर की लापरवाही से बच्चे की गई जान, हॉस्पिटल हुआ सीज | New India Times
आज स्वास्थ्य विभाग और सीएमएचओ की लापरवाही देखने को मिली है। क्या ऐसे हॉस्पिटलों को खोलने की परमिशन दी जाती है जिसमें आईसीयू के नाम पर केवल एक छोटा सा कमरा और वह भी गोदाम में तब्दील, इनकी लापरवाही का खामियाजा भुगतते हैं आमजन???

ऐसी ही लापरवाही आज देखने को मिली, जिसमें 4 माह के बच्चे आयुष कौरव की जान चली गई। गोलपहाड़िया निवासी ध्यानेन्द्र कौरव के बच्चे को मामूली सर्दी जुकाम था, उसे चेकप के लिये मुस्कान बाल चिकित्सालय रोक्सिपुल के नीचे डॉ ऐ के जैन के हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहाँ डॉक्टर ने चेकप कर बच्चे को भर्ती करने की सलाह दी, जिसके बाद उस बच्चे का इलाज शुरू किया गया। इलाज के दौरान बगैर डिग्री के पदस्थ कंपाउंडर ने गलत इंजेक्शन लगाया और 10 मिनिट बाद बच्चे ने दम तोड़ दिया, जिसके बाद परिजनों ने डॉ ऐ के जैन से बोला तो वह परिजनों को केवल दिलासा देते रहे कि बच्चे का चेकप कर रहे हैं, लेकिन बच्चे दम तोड़ चुका था। इसकी सूचना पुलिस व सीएमएचओ को दी गई। मौके पर कोतवाली थाना व माधोगंज थाना प्रभारी दलबल के साथ पहुंचे और परिजनों की बात गम्भीरता से सुनी। कोई अप्रिय घटना न हो इसको लेकर हॉस्पिटल में पुलिस बल तैनात किया गया। इसके बाद जब हॉस्पिटल का निरीक्षण श्री जादोन ने किया तो पाया कि हॉस्पिटल में सुबिधाओं के नाम पर केवल दिखावा था, जैसे PICU रूम बनाया गया था, उस रूम में केवल ऑक्सीजन देने की मशीन के अलावा कोई भी साधन नहीं था बल्कि गोदाम बना रखा था। जब श्री जादोन ने हॉस्पिटल के स्टाफ की डिग्री मांगी तो वह नहीं दिखा सके, साथ ही हॉस्पिटल में गंदगी थी, साफ सफाई का नमो निशान नहीं था। वही वाटर कूलर में मच्छर हो रहे थे, इसके अलावा हॉस्पिटल में एक्सपायरी डेट की दवाएं भी पाई गई जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया। इन सभी अनिमितताओं के  चलते हॉस्पिटल को सीज करने की कार्यवाही की गई। पुलिस और सीएमएचओ को मृतक बच्चे के परिजनों ने पूरा सहयोग किया और किसी भी प्रकार की हॉस्पिटल में अप्रिय घटना नही हुई।

पुलिस ने बच्चे के शव को कब्जे में लेकर शव का पीएम कराया। पीएम तीन सदस्यीय डॉक्टरों के पैनल द्वारा किया गया, उसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने पीएम रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्यवाही किये जाने की बात कही है।

जिला प्रशासन अगर ईमानदारी से अपना काम करे तो शहर में लगभग 60% ऐसे हॉस्पिटल व नर्सिंगहोम संचालित होते पाए जाएंगे,जो नियम विरुद्ध चल रहे हैं।

By nit

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