भाजपा के दिग्गज नेता राजेन्द्र राठौड़ की राजनीति उतार की तरफ खिसकने लगी, कस्वां परिवार से अदावत राठौड़ को भारी पड़ने लगी | New India Times

अशफ़ाक़ क़ायमखानी, ब्यूरो चीफ, जयपुर (राजस्थान), NIT:

भाजपा के दिग्गज नेता राजेन्द्र राठौड़ की राजनीति उतार की तरफ खिसकने लगी, कस्वां परिवार से अदावत राठौड़ को भारी पड़ने लगी | New India Times

राजस्थान विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति के बाद सबसे पहले 1985 में चूरु विधानसभा से जनता पार्टी के निसान पर चुनाव लड़कर हार का मजा चखने वाले भाजपा नेता राजेन्द्र राठौड़ की राजनीति अब अन्य भाजपा नेता रामसिंह कस्वां व उनके पुत्र सांसद राहुल कस्वां से टकराव के बाद उतार की तरफ जाती नज़र आने लगी है।

1990-व 1993 में जनता दल के नीसान पर चुनाव लड़कर चूरु से विधायक बनने वाले राजेन्द्र राठौड़ फिर जनता दल (दिग्विजय) के मार्फत भाजपा में चले गये। उसके बाद 2018 तक चूरु व एकदफा तारानगर से विधायक बनते रहे। लेकिन 2023 में राठौड़ तारानगर से चुनाव क्या हारे कि उनको हार का असहनीय झटका लगा। जिस झटके से वो अभी तक उभर ही नहीं पा रहे हैं। लगते अभी सांसद राहुल कस्वां से टकराव के बाद उनकी भाजपा से टिकट कटवा कर अपने समर्थक झाझड़िया को टिकट दिलाने में राठौड़ सफल जरुर हुये लेकिन राहुल ने पाला बदल कर कांग्रेस की टिकट लेकर फिर झाझड़िया को हराकर सांसद बनकर राजनीतिक मुकाबले में काफी पिछे धकेल दिया। यह लोकसभा चुनाव एक तरह से राठौड़ व कस्वां के मध्य ही माना जा रहा था।

21-अप्रेल 1955 को जन्मे राजेन्द्र राठौड़ पहली दफा राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष बनकर चर्चा में आये। फिर कल्याण सिंह कालवी की जनता पार्टी की युवा शाखा “युवा जनता” के प्रदेश अध्यक्ष बनकर युवाओं के मध्य राजनीति की। 1985 में चूरु विधानसभा से पहला चुनाव लड़ा पर जीत नहीं पाये। सती रुपकवंर मामले में चले आंदोलन में राठौड़ काफी चर्चा में रहेः 1990 में जनता दल के टिकट पर पहली दफा चूरु से विधायक बने। जो 2018 के चुनाव तक विधायक बनते रहे। मंत्री व विपक्ष के नेता भी रहे हैं अपनी ही पार्टी के नेता रामसिंह कस्वा से टकराव होने पर 2023 का विधानसभा चुनाव हार गये।

कुल मिलाकर यह है कि आगामी विधानसभा चुनाव के समय राजेन्द्र राठौड़ पचेतर साल के करीब होने पर उनकी टिकट पर सवाल खड़े होने लगेंगे। केसी वेणुगोपाल की राज्यसभा की सीट पर उपचुनाव होने पर उस उपचुनाव में राज्यसभा जाने या फिर किसी अन्य राज्यसभा सीट से चयन होने पर तो राठौड़ राजनीति में खड़े रह सकते हैं। वरना राठौड़ की राजनीति अब उतार की तरफ खिसकना लगभग तय माना जा रहा है।

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