नंबर गेम में उलझी सड़कें, निर्माण में जर्जर हो चुकी है  NH 753, अजंता घाटी में बढ़े हादसे | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

नंबर गेम में उलझी सड़कें, निर्माण में जर्जर हो चुकी है  NH 753, अजंता घाटी में बढ़े हादसे | New India Times

कई सड़कों को अनेकों नंबर से चिन्हित किया गया तो उस सड़क की मुख्य पहचान गायब हो जाती है। ऐसा मज़ेदार किस्सा महाराष्ट्र के जलगांव – औरंगाबाद – अहमदनगर – पुणे राष्ट्रीय राजमार्ग के बारे मे देखने को मिल रहा है। NH 753 L , H , F को फुलंब्री के पास NH 752 H कर दिया गया है। जलगांव की ओर वो NH 753 L हो जाता है। औरंगाबाद से पुणे तक की फोरलेन सड़क कही राज्य मार्ग नंबर 5, राष्ट्रीय महामार्ग नंबर 22 तो कही NH 753 L इस अलग अलग पहचान के कारण अपनी असली पहचान से बाहर हो जाती है। PWD ने इस प्रकार की उलझन क्यों पैदा कर रखी है इसका जवाब टोल का पैसा लूटने वाली आधी अधूरी शिंदे – फडणवीस सरकार को देना चाहिए। ज्ञात हो कि NH 753 पर अजंता के पास नया टोल नाका बनाया जा रहा है।

नंबर गेम में उलझी सड़कें, निर्माण में जर्जर हो चुकी है  NH 753, अजंता घाटी में बढ़े हादसे | New India Times

अब हम बात करेंगे NH 753 जलगांव – औरंगाबाद फोरलेन की, इस सड़क को लेकर New India Time’s ने ज़मीनी हकीकत से जुड़ी आधा दर्जन स्टोरीज प्रकाशित की है। पांच साल बीत चुके हैं मराठवाड़ा प्रादेशिक विभाग में बन रही ये फोरलेन बन रही है या बर्बाद की जा रही है यही पता नहीं चलता। जितने भी ब्रिज बनाए गए हैं उनका सड़क समतल बेमेल यानी मिस मैच है। निर्माण की गुणवत्ता कितनी हद तक घटिया रखनी है यह नेताओं और अधिकारियों को जाने वाले पॉकेट मनी (शायद इलेक्टोरल बॉन्ड भी दिया गया होगा) से सेट किया जा चुका है।

भाजपा के नाकाम लेकिन किस्मतबाज नेता कट कमीशन लेकर इन सीमेंट कांक्रीट की सड़कों को जनता को दिखाकर विकास विकास चिल्लाने लगे। प्रभारी सड़क मंत्री नितिन गडकरी ने एक बार भी इस प्रोजेक्ट का ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया। गडकरी चाहे तो सिल्लोड से औरंगाबाद बाय कार यात्रा कर सकते हैं। अजंता घाटी में बीते तीन दिनों में चार हादसे हो चुके हैं, हादसों की तादात बढ़ती जा रही है। फोरलेन पर हर रोज़ होने वाली सैकड़ों दुर्घटनाओं के बाद सेवाकार्य के नाम पर इस्तेमाल की जाने वाली एंबुलेंस सर्विस नेताओं के लिए प्रचार अभियान का अवसर साबित हो चुकी है। राजमार्गों की पहचान छिपाने के पीछे मरम्मत, निर्माण के ठेके और टोल नाकों के गफलो को छिपाने की साजिश तो नहीं ऐसा सवाल जनता से पूछा जा रहा है।

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