जनता के बीच सम्मान का अभाव और मनचाहे लाभ से महरूम लोग घर वापसी के मूड में, क्या महाराष्ट्र में चल पड़ेगी लहर? ट्रेंड से मविआ को हो सकता है नुकसान | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

जनता के बीच सम्मान का अभाव और मनचाहे लाभ से महरूम लोग घर वापसी के मूड में, क्या महाराष्ट्र में चल पड़ेगी लहर? ट्रेंड से मविआ को हो सकता है नुकसान | New India Times

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की सरकार गिराने के बाद बनाई गई शिंदे-फडनवीस सरकार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा असंवैधानिक करार दिया गया था और इसी गैर कानूनी सरकार को बचाने के लिए 70+25 हजार करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार के आरोपों के धनी अजित पवार को सरकार में शामिल करवाया गया। यह सब किसके इशारे पर और क्यों किया गया जनता सब जानती है। एकनाथ शिंदे और अजित पवार के विधायकों और नेताओं के साथ गए कार्यकर्ता एक बार फिर घर वापसी के मूड मे नज़र आ रहे हैं। शिवसेना और NCP में कराई गई टूट से महाराष्ट्र की आम जनता में काफ़ी गुस्सा देखा जा रहा है। इसी असंतोष के चलते शिंदे-पवार दल में शरीक कार्यकर्ताओं को जनता की हिकारत का सामना करना पड़ रहा है। सत्ता में होने के बाद भी इन कार्यकर्ताओं को सत्ता का माकूल लाभ नहीं मिल पा रहा है। जो बड़े नेता भाजपा में गए हैं उनको लाभ के बजाय गेंदे के फूलों की माला से सम्मान और सरकार के साथ साथ ED, CBI, Income tax, LCB लोकल पुलिस से संरक्षण प्रदान किया जा चुका है। जलगांव जिले में कई ब्लॉक्स से खबरें आ रही हैं कि NCP छोड़ कर NCP (Ajeet Pawar) में जाने वाले NCP (Ajeet Pawar) से फिर NCP (Shard Chanra Pawar) में जाने की राह तलाश रहे हैं। ग्राउंड जीरो पर जहां जहां भाजपा मजबूत है उन निर्वाचन क्षेत्रों में इन आयाराम गया रामों का उनकी पार्टी के विस्तार में दिया गया योगदान उनके अपने पोलिंग बूथ के मेरिट से मालूम पड़ता है। अगर महाराष्ट्र में गयाराम आयाराम बनकर वापसी करेंगे और नेता चौखट पर खड़े हो कर उनका स्वागत करते है तो उस मतदाता ने क्या करना चाहिए जिसका ज़मीर जिंदा था इस लिए उसने इन गया रामों को हिकारत की नज़र से देखा था हवा का रुख भांपकर कल को कई विधायक बड़े बड़े नेता भी वापिस आ सकते हैं। राजनीति में अनीति से क्या कुछ किया जा सकता है यह महाराष्ट्र के रास्ते राष्ट्र को पता चल गया है। महाराष्ट्र महाविकास आघाड़ी में घर वापसी का ट्रेंड दौड़ पड़ा तो इसका सबसे अधिक नुकसान महाविकास आघाड़ी में शामिल तीनो पार्टियों को होगा। जनता साफ़ सुथरी राजनीति चाहती है जिसके लिए जरूरी है कि तीनों दल नई युवा पीढ़ी को पुरोगामी विचारों के संस्कार और दल के भीतर समान अवसर बहाल करें।

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