महाराष्ट्र विधानसभा में बजट सत्र चल रहा है या मॉडलिंग का ऑडिशन, कौन लाएगा केंद्र से GST का 25 हज़ार करोड़ रूपया, राज्य में सबसे अधिक किसान ने किया आत्महत्या | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

महाराष्ट्र विधानसभा में बजट सत्र चल रहा है या मॉडलिंग का ऑडिशन, कौन लाएगा केंद्र से GST का 25 हज़ार करोड़ रूपया, राज्य में सबसे अधिक किसान ने किया आत्महत्या | New India Times

राज्य के प्रत्येक नागरिक और उसके परिवार के हर सदस्य का बजट से जीवन मरण का संबंध होता है। 2014 के बाद दलाल मीडिया ने जनता को संसदीय लोकतंत्र से दूर कर दिया है। देश के जिन राज्यों में विपक्ष की सरकारे हैं वहां भाजपा और उसका कमल छाप बूम नए भारत की प्रतिक्षा में है। महाराष्ट्र विधानसभा के कामकाज को देखकर समझ में नहीं आ रहा है कि सदन में और सदन के बाहर बजट सत्र चल रहा है या मंत्री, विधायकों के मॉडलिंग का ऑडिशन। वित्त मंत्री अजीत पवार ने 8,609.17 करोड़ रूपए मांग का प्रस्ताव रखा। अब कुल मिलाकर 63 हजार करोड़ रुपए की मांग निश्चित हो चुकी है। जुलाई 2024 तक के इस अंतरिम बजट में केवल 2,019.28 करोड़ रूपया शाश्वत है। राज्य के ऊपर 63 हजार करोड़ रुपए के वित्तिय घाटे के साथ तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक का ऋण चढ़ चुका है।

महाराष्ट्र विधानसभा में बजट सत्र चल रहा है या मॉडलिंग का ऑडिशन, कौन लाएगा केंद्र से GST का 25 हज़ार करोड़ रूपया, राज्य में सबसे अधिक किसान ने किया आत्महत्या | New India Times

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कैमरा जीवी शैली का अनुकरण करते हुए शिंदे-फडणवीस सरकार के तमाम मंत्री मंदिर-पूजा-अर्चना, ध्यान-ज्ञान, सूट-बूट-कोट-टाय-पैंट, हाई-हेलो-बाय जैसे अभिनयों के पलों को अपनी ससंदीय पारी में सदाबहार बना रहे है। महाराष्ट्र GST के तौर पर केंद्र को एक रुपया देता है तो उसके बदले राज्य को केंद्र से मात्र 0.8% पैसा मिलता है। उद्धव ठाकरे सरकार के समय केंद्र ने राज्य को GST का 15 हजार करोड़ रूपया दिया नहीं। आज यह आंकड़ा 25 हजार करोड़ रुपए हो चुका है। लोक निर्माण विभाग का दस हज़ार करोड़ रूपया तीन साल से सरकार पर बकाया है, अकेले जलगांव से कल तक 300 करोड़ पेंडिंग थे आज कितना है पता नहीं। फंड के अभाव से एक लाख करोड़ रूपए के प्रॉजेक्ट्स की कॉस्ट डेढ़ लाख करोड़ रूपए हो चुकी है।

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बीते साल महाराष्ट्र में तीन हज़ार किसानों ने आत्महत्या की इस साल का आंकड़ा सरकार ने घोषित नहीं किया है। राज्य में हिंदू मुस्लिम का मुद्दा चला नहीं तो जातिगत आरक्षण के आंदोलनों को राजनैतिक हथियार बनाकर जनता को भरमाने में भाजपा ने कोई कसर बाकी नहीं रखी है। 400 पार की भाषा बोलने वाले भाजपा नेता पर्दे के पीछे अपने हि पार्टी नेतृत्व के पैर छूकर लोकसभा का टिकट कटवाने की खुशामद में लगे हैं। इन भाजपा नेताओं के अपने विधनसभा निर्वाचन क्षेत्रों में तीस तीस सालों से फूटी कौड़ी का काम नहीं हो सका है। अपनी तीसरी टर्म की सनक को पुरा करने के लिए प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र जैसे प्रगतिशील राज्य के साथ जो अन्याय और अत्याचार किया है उसे जनता कभी भुला नहीं सकती।


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