नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

सरकारी रेकॉर्ड से यावल अभयारण्य की संरक्षित वनक्षेत्र वाली पहचान को अब मिटा देना चाहिए क्योंकि सरकार की घोर अनदेखी और प्रशासन की पैसाखोरी के कारण सातपुडा सूखे बीहड़ में तब्दील हो चुका है। महाराष्ट्र में बसे और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित 175 वर्ग किमी में फैले इस इलाके का हमने दौरा किया। खिरोदा से आगे फॉरेस्ट चेक नाका पार कर राजमार्ग नं 45 से जैसे हि आप पाल की ओर सातपुडा की चढ़ाई के लिए आगे बढ़ते है वैसे जंगल के अभाव से पहाड़ की ऊंचाई कम मालूम पड़ती है। 10 किमी की घुमावदार घाटी मे बनाए गए व्यू प्वाइंट से सातपुडा की बर्बादी के कई पहलु नज़र आते है। गावारडी और गोरबर्डी में पावरा, बारेला आदिवासियों की कुछ बस्तियां है यहां सरकारी स्वास्थ केंद्र के अलावा और कुछ भी नहीं है। जंगल के नाम पर जलावू लकड़ी का बीस फिट ऊंचाई से बड़ा एक भी पेड़ सातपुडा में नहीं है।

जानवरों और इंसानों की प्यास बुझाने के लिए सूकी मध्यम सिंचाई प्रकल्प है। अनेर-मांजरी नदी और नालों के प्राप्त पर कृषि विभाग द्वारा करोड़ों की लागत से बने छोटे छोटे बांध भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुके है। पाल , जामन्या , लंगड़ा आंबा , देवझरी इन चार कंपार्टमेंट में बटा सातपुड़ा संवर्धन के नाम पर नोचा जा रहा है। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की भूमिका संदेह के घेरे में है, पहाड़ी के नीचे अवैध रूप से गौण खनिज का उत्खनन किया जा रहा है। गारबरडी वनखंड में बिना पानी का सरकारी पौधारोपण किया जा रहा है , कई टीलों पर ट्रेंचेस बनाए जा रहे हैं। बरसों से होते आ रहे इन तमाम कामों से अधिकारियों ने सरकारी तिज़ोरी से आए हजारों करोड़ रूपयों के भ्रष्टाचार को ज़मीन के भीतर दफना दिया है। भ्रष्टाचार के मकबरों को सातपुडा के बाहर बड़े बड़े शहरों में आलीशान बंगलों की शक्ल में खोजना पड़ेगा। फिल्म पान सिंह तोमर में पान सिंह बने इरफान खान ने अपने संवाद में कहा है कि ” बीहड़ मे बागी होते है , डकैत मिलते है पार्लियामेंट मे “। New India Time’s अपने पाठकों को सातपुडा के सच से अवगत कराने का प्रयास ज़ारी रखेगा।

