सरवर खान ज़रीवाला, भोपाल, NIT;
मध्यप्रदेश में कोचिंग क्लासेस की मनमानी को रोकने और कोचिंग संस्थानों की मानक तय करने के लिए शिवराज सरकार कानून बनाने की तैयारी कर रही है।
मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश में संचालित हो रहे कोचिंग संस्थानों पर नकेल कसना इस लिये जरूरी हो गया है क्योंकि कोचिंग क्लासेस में मनमानी चल रही है और इनके शिक्षा और शिक्षकों के लिए कोई गाइडलाइन नहीं है न ही सरकार का इन पर कोई कंट्रोल है। इसके लिए तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री दीपक जोशी ने एक्ट बनाने को कहा है। कोचिंग संस्थानों के लिए कानून इसलिए लाने की तैयारी चल रही है क्योंकि अब तक इनकी मॉनीटरिंग कोई विभाग नहीं कर रहा है। स्कूल, तकनीकी और उच्च शिक्षा विभाग का कोचिंग संस्थानों में किसी प्रकार का दखल नहीं है।
शिकायत के अनुसार कोचिंग संस्थान छात्रों से मोटी फीस वसूलते हैं लेकिन उनकी गुणवत्ता की मॉनीटरिंग नहीं होती है। वह छात्रों से जितनी फीस लेते हैं उसके मुताबिक सुविधा और शिक्षा देते हैं या नहीं इस पर भी कोई विभाग नजर नहीं रखता है। इस कारण इसका सीधा खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ता है।
कोचिंग संस्थान छात्रों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाने के नामरपर मोटी रकम एडवांस फीस के तौर पर लेते हैं। अगर छात्र किसी कारण से बीच में कोचिंग छोड़ता है तो उसे फीस वापस नहीं की जाती है। इसके अलावा यहां की फैकल्टी के लिए भी किसी प्रकार के मानक तय नहीं है। मसलन, पढ़ाने वालों की शिक्षा का स्तर क्या हो, छात्रों को किस तरह की सुविधा दी जाए, कितनी फीस ली जाए आदि। यह मनमर्जी से छात्रों से फीस वसूलते हैं। इस कारण कोचिंग संस्थानों के मानक तय किए जाने की तैयारी चल रही है।

कोचिंग संस्थानों पर नजर लगने के लिए शासन को एक्ट बनाने को कहा गया है। इसकी तैयारी चल रही है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि कोचिंग संस्थानों की मनमर्जी न चल सके और छात्रों को नुकसान न हो। इसलिए इनके मानक तय किए जाने हैं। इस दिशा में काम चल रहा है। इस तरह की जानकारी दीपक जोशी, राज्य मंत्री,तकनीकी शिक्षा ने मीडिया को दी है।
