नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

आरक्षण के लिए मराठा समाज की ओर से लाखों की संख्या में आयोजित शांतिप्रिय आंदोलनों की विश्व समुदाय ने सराहना कि लेकिन जालना में अनशन पर बैठे आंदोलकों पर पुलिस की ओर से अचानक किया गया लाठीचार्च गृहमंत्री के आदेश के बिना हो हि नहीं सकता ऐसा आरोप NCP नेता संजय गरुड़ ने सरकार पर लगाया है। जामनेर में सकल मराठा समाज की ओर से रास्ता रोको और धरना आंदोलन किया गया। कांग्रेस के शरद त्रंबक पाटील ने कहा 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने मराठा और मुसलमानों को आरक्षण दिया तब किसी ने हाई कोर्ट में पीआईएल फाइल कर उसपर रोक लगा दी। 2018 में CM देवेंद्र फडणवीस ने कानून लाया जिसे किसी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

आरक्षण के मामलों पर कोर्ट जाकर अडंगा लाने वाले यह कौन लोग हैं और किसके इशारे पर काम कर रहे हैं यह जनता को पता है। दिल्ली के हुक्मरान महाराष्ट्र में गैरकानूनी सरकार चला सकते हैं तो मराठों को आरक्षण क्यों नहीं दे सकते। निगम तिराहे पर रास्ता रोको करने वाले आंदोलकों ने देवेन्द्र फडणवीस के खिलाफ़ आक्रोश व्यक्त करने के लिए निषेध बैनर के सामने तरबुज रख दिए। वंदना चौधरी, जावेद मुल्लाजी, शंकर मराठे, अनील बोहरा, डा प्रशांत पाटील, प्रफुल्ल लोढ़ा, दिलीप खोडपे, ज्ञानेश्वर बोरसे, संतोष झालटे, विश्वजीत पाटील समेत सैकड़ो आरक्षण समर्थक उपस्थित रहे। ज्ञात हो कि तमाम आंदोलनो से गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस के इस्तीफे की उठने वाली मांग बड़ी सफाई के साथ मिडिया से गायब कर दी गई है।

मराठा आंदोलन को लेकर भाजपा नेता गिरीश महाजन की मध्यस्थता फेल हो चुकी है। नौ साल से केंद्र और राज्य की सत्ता में रही भाजपा महाराष्ट्र में मराठा धनगर मुस्लिम लिंगायत समाज के सामाजिक आरक्षण के मसले पर टोटल विफल रही है। देश में जातिगत जनगणना तो भाजपा ने कभी करवाई हि नहीं, आनेवाले समय में इस विषय को लेकर आंदोलन होने तय है।
