नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

कोरोना काल में सुशासन चलाने वाली उद्धव ठाकरे सरकार पर विकास कामों को लेकर कोताही बरतने का आरोप लगाने वाली भाजपा के सत्ता में आने के बाद राज्य के वित्तीय हालात सुधरने के बजाये बिगड़ गए हैं। अनुच्छेद 154 का आधार लेकर गवर्नर के नाम से राज्य में जबरन चलाई जा रही शिंदे-फडणवीस-अजीत पवार सरकार में फंड को लेकर घमासान मचा हुआ है। इसी बीच उस जलगांव जिले से जहां से तीन कैबिनेट मंत्री हैं वहा से यह खबर आ रही है की जून 2023 से जलजीवन मिशन योजना के लिए फंड ही नहीं मिला है। गुलाबराब पाटील और गिरीश महाजन के निर्वाचन क्षेत्रों में जलजीवन के लगभग 200 करोड़ रुपए के काम शुरू हैं।

इस मसले पर हमने ग्रामीण जलापूर्ति विभाग जिला परिषद जलगांव के कार्यकारी अभियंता से बात की तो उन्होंने बताया कि आम तौर पर जलजीवन मिशन के फंड को कोई रोकथाम नहीं होती है लेकिन इस बार फंड रिलीज होने में देरी अवश्य हुई है। जलजीवन मिशन में काम करने वाले कर्मी ने कहा कि आखिरी बिल जून 2023 को पेश किया था जो मंजूर नहीं हो सका है। ठाकरे सरकार के रहते विकास विकास चिल्लाकर ठेकेदारों के हित में सड़क जाम करने वाले नेता आज उनकी अपनी ट्रिपल इंजिन सरकार में मुंह में दही जमाए बैठे हैं। भाजपा के प्रवक्ताओं को मीडिया के सामने अपनी पार्टी छोड़ शिंदे- अजीत पवार के पक्ष में वकालत करना पड़ रही है। ग्रामीण जलापूर्ति, महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण, ग्रामविकास इन विभागों के साझा समन्वय से चलाई जा रही जलजीवन मिशन योजना शुरू से आलोचना का विषय रही है।
खडसे ने उठाए कई सवाल
जलजीवन मिशन के हजारों करोड़ रुपए के टेंडर्स, वर्क ऑर्डर और आनन फानन में लिए गए सरकार के निर्णयों को लेकर विधायक एकनाथ खडसे ने सदन में सैकड़ों सवाल उठाए लेकिन जनता को किसी भी सवाल का जवाब ठीक से नहीं मिला। जलजीवन योजना के पहले जलापूर्ति की दर्जनों योजनाएं थीं जो भ्रष्टाचार की भेंट चढ गई हैं।

