गाेला व बॉकेगंज से कुकरा जाने वाली मुख्य सड़क गढ्ढों में तब्दील, वाहन से हाेकर गुजरने वाले लाेगों काे गवानी पड़ सकती है अपनी जान | New India Times

वी.के.त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

गाेला व बॉकेगंज से कुकरा जाने वाली मुख्य सड़क गढ्ढों में तब्दील, वाहन से हाेकर गुजरने वाले लाेगों काे गवानी पड़ सकती है अपनी जान | New India Times

जिले में बदहाल सड़कें स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं और मुख्यमंत्री द्वारा सड़कों को गड्ढामुक्त करने का आदेश भी बेअसर है। जिले के मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों व कस्बा सहित अधिकांश सड़कों की हालत काफी खराब है। यहां कई वर्षों से लोग जर्जर सड़क पर ही आवागमन कर रहे हैं। बता दें कि गाेला कुकरा बॉकेगंज मार्ग हाेते हुए यह भीरा काे भी मार्ग जाता है जिस मार्ग पर गड्ढे ही गड्ढे हैं। इस सड़क पर प्रतिदिन हजारों लोगों का आवागमन रहता है।
वहीं इस मार्ग से हाेकर वाहन से गुजरने वाले राहगीरों ने बताया कि अभी कुछ दिन पहले इस सड़क की मरम्मत हुई थी लेकिन महीने दाे महीने में दाेबारा बद से बत्तर हालत सड़क की हाे गई है। वहीं लाेगों का कहना है कि इन गढ्ढों की बजह से किसी भी समय घटना हाेने की सम्भावना बनी रहती है साथ ही अभी लगभग दो माह पूर्व मुख्य मार्ग पर गढ्ढों काे लेकर मरम्मत की गई थी लेकिन इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। मार्ग जर्जर होने के चलते अक्सर राहगीर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।

स्थिति अब भी वही

रात्रि या दिन के समय लाेगों को इन गढ्ढों से हाेकर गुजरते वक्त अचानक अपनी जान भी गवानी पड़ सकती है। किसी ने भी सड़क निर्माण सही ठंग से कराने की जहमत नहीं उठाई है। लोग जर्जर सड़क पर आवागमन करने को मजबूर हैं। बरसात के दिनों में स्थित और भी दयनीय हो जाती है। वहीं बरसात के दिनों में तो इस मार्ग पर लाेगाे काे बड़े सम्भल कर निकलना पड़ता है साथ ही बॉकेगंज से 12 किलाेमीटर गाेला गाेकर्णनाथ जाने का समय जहॉ 30 मिनट की जगह घन्टाें में तय करना पड़ता है।
यहीं हाल गोला से लखीमपुर खीरी सड़क जाने वाले हाइवे सात सौ तीस का भी है। जिस पर शासन से लेकर प्रशासन तक के आलाधिकारियों व राजनेताओं का आना जाना रहता है लेकिन इस तरफ किसी का भी ध्यान नहीं जाता है। जबकि कई बार समाचार पत्र में इस समस्या को लिखा गया है पंरतु राजनेताओं व आलाधिकारियों पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ा और पड़े भी क्यों क्योंकि यह लोग लग्जरी गाडियों से निकलते है तो उनको सड़कों के गढ्ढें का ऐहसास ही नहीं होता है। क्या इसीलिए जनता सांसद, विधायक, पंचायत सदस्य और प्रधान चुनती है कि जनता के पैसों पर ही यह राजनीति के लोग केवल ऐशआराम करें और जनता की भलाई, विकास कार्य आदि समस्याएं दूर न करें। क्या यही सब चुनाव के समय जनता से वादें किए जाते हैं???

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