कोरोना में परिजनों को खोने वाले बच्चों के लिए 'आशा का झरना' एनजीओ ने दी आर्थिक सहायता राशि। जिला कलेक्टर ने कहा कि अनाथ बच्चों का सर्वे करवाकर पालनहार योजना में करवाएं लाभान्वित | New India Times

अशफाक कायमखानी, सीकर/जयपुर (राजस्थान), NIT:

कोरोना में परिजनों को खोने वाले बच्चों के लिए 'आशा का झरना' एनजीओ ने दी आर्थिक सहायता राशि। जिला कलेक्टर ने कहा कि अनाथ बच्चों का सर्वे करवाकर पालनहार योजना में करवाएं लाभान्वित | New India Times

जिला कलेक्टर अविचल चतुर्वेदी ने सोमवार को कोरोना महामारी में अपने परिजनों को खो चुके बच्चों के लिए आशा का झरना स्वयं सेवी संस्था के माध्यम से जर्मनी में रहने वाले अप्रवासी भारतीयों के संगठन डीआईएफके के सहयोग से सीकर जिले के 12 परिवारों के 27 बच्चों को राशन सामग्री, स्कूल की फीस, बेटियों के लिए आर्थिक सहायता राशि के चैक, आजीविका के लिए सिलाई मशीन व लघु व्यवसाय के लिए सामग्री वितरित की।
जिला कलेक्टर अविचल चतुर्वेदी ने बताया कि कोविड महामारी के दौर में जिन बच्चों ने अपने माता-पिता को खोया है ऎसे बच्चों को आर्थिक सहायता राशि के चेक वितरित किये गये हैं जो एक सराहनीय कार्य है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री कोरोना सहायता योजना के अन्तर्गत घोषणा की थी उसके अनुसार जिले में स्वीकृतियां निकालनी शुरू कर दी गई है तथा ऎसे बच्चों को राजकीय योजना में लाभ दिलाने का प्रयास करेंगे।
इस अवसर पर उन्होंने बाल संरक्षण इकाई एवं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को निर्देश दिये कि वे संयुक्त रूप से कार्य कर जिन बच्चों ने कोविड -19 के दौरान अपने माता-पिता खोये है उनकों आर्थिक सहायता राशि उपल्बध कराने के लिए सूची तैयार करे एवं पालनहार योजना में उनको जोड़कर लाभान्वित करवायें। उन्होंने कहा कि पालनहार योजना में एक भी बच्चा छुटे नहीं तथा सभी डेटा तैयार कर सत्यापित करने के निर्देश दिये।
जिला बाल संरक्षण इकाई सहायक निदेशक प्रिंयका पारीक ने बताया कि जर्मनी में रहने वाले अप्रवासी भारतीयों के संगठन के सहयोग से आशा का झरना स्वयं सेवी संस्था द्वारा संबल अभियान चलाया गया हैं। उन्होंने बताया कि चाईल्ड हैल्प लाईन के माध्यम से अनाथ बच्चों का सर्वे करवाया गया जिसमें 29 बच्चों को चिन्हित किया गया जो कोविड के दौरान अनाथ हो चुके है, उनको आर्थिक सहायता के रूप में 3 लाख 5 हजार रूपये की सहायता राशि दी गई है जिसके अन्तर्गत राशन किट, सिलाई मशीन, स्कूल की फीस आदि दी गई है।
आशा का झरना संस्था निदेशक सुदीप गोयल ने बताया कि डीआईएफके द्वारा प्रोजेक्ट संबल के अन्तर्गत आशा का झरना एनजीओ के माध्यम से असहाय बच्चों को मदद देने का सिलसिला जारी रहेगा।
इस दौरान सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग सहायक निदेशक ओमप्रकाश राड़, चाईल्ड हैल्पलाईन समन्वयक राहुल दानोदिया व आशा का झरना समन्वयक तरुण दुबे, चित्रा, दीपक उपस्थित रहें।

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