फुटपाथों पर ज़िंदगी गुज़ार रहे ग़रीबों को भुगतना पड़ा लॉक डाउन का ख़मयाज़ह, एक वक़्त की रोटी के लिए तरसे ज़रूरतमंद | New India Times

अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:

फुटपाथों पर ज़िंदगी गुज़ार रहे ग़रीबों को भुगतना पड़ा लॉक डाउन का ख़मयाज़ह, एक वक़्त की रोटी के लिए तरसे ज़रूरतमंद | New India Times

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए प्रदेश के तीन शहरों भोपाल, इंदौर और जबलपुर में हर रविवार को टोटल-लॉक-डाउन का आदेश जारी किया है। जिसका व्यापक असर आज राजधानी भोपाल में देखने को मिला। सुबह से ही सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा. पुलिस द्वारा जगह जगह बैरिकेटिंग कर चेकिंग की जा रही थी। किसी भी तरह का आवागमन प्रतिबंधित रहा, सिर्फ बीमार लोगों को अस्पताल जाने और यात्रियों को एयरपोर्ट एवं रेलवे स्टेशन जाने की छूट रही, इसके अलावा कॉलेज छात्रों और छात्राओं का आज एक महत्वपूर्ण पेपर था तो उनके लिए प्रशासन ने बसों की व्यवस्था की थी लेकिन सरकार ने उन ग़रीबों के खाने पीने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की जो फुटपाथों पर गुज़र बसर कर रहे हैं। लॉक डाउन से आज वह तबक़ा सबसे ज़्यदा परेशान होता हुआ नज़र आया।

फुटपाथों पर ज़िंदगी गुज़ार रहे ग़रीबों को भुगतना पड़ा लॉक डाउन का ख़मयाज़ह, एक वक़्त की रोटी के लिए तरसे ज़रूरतमंद | New India Times

इस मौके जमीअत उलमा मध्य प्रदेश के प्रेस सचिव हाजी मोहम्मद इमरान ने NIT सवांददाता से बात करते हुऐ कहा कि बड़ी संख्या में एक तबक़ा फुट पथों पर अपनी ज़िंदगी गुज़ार रहा है जो लॉक डाउन के चलते एक वक़्त की रोटी के लिए तरस गया। उनका कहना था कि हमारी टीम कुछ जगहों पर पहुंचीं लेकिन सभी जगह पहुंचना मुमकिन ना हो सका क्योंकि हज़ारों की तदाद में यह ग़रीब तबक़ा फुट पथों पर अपनी ज़िंदगी गुज़ार रहा है। जो लोग धर्म कर्म करते हैं वह लॉक डाउन के चलते इनके पास पहुंच नहीं पाए औऱ ना ही सरकारी स्तर पर इनके लिए खाने पीने का कोई इंतेज़ाम हो सका जिससे लगभग 99 प्रतिशत ज़रूरतमंद आज भूखे रहे।

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