भोपाल के क़ब्रिस्तानों में अब मरहूमीन भी नहीं हैं सुरक्षित | New India Times

अबरार अहमद खान, स्टेट ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

भोपाल के क़ब्रिस्तानों में अब मरहूमीन भी नहीं हैं सुरक्षित | New India Times

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कब्रों की हालत बद से बदतर होती जा रही है लेकिन न तो इस ओर क़ब्रिस्तान कि समिति का ध्यान है और न ही मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड का। आप को बता दें कि एक वीडियो व्हाट्सएप पर तेज़ी से वायरल हो रहा है जिस में एक युवक पुराने पटीयों को धोता हुआ नज़र आ रहा है।
बताया जा रहा है कि यह वीडियो भोपाल के बड़ेबाग कब्रिस्तान का है जहाँ पुरानी कब्रों से पटिये निकाल कर उनको साफ किया जाता है और धोया जाता है उन पटियों को मरहूम के कब्र में फिर से लगाया जाता है और मरहूम के घर वलों से नये पटियों की कीमत वसूली जाती है। ऐसे में जमीअत उलमा मध्यप्रदेश के प्रेस सचिव हाजी मोहम्मद इमरान का कहना है कि क़ब्रस्तानों, मकबरों की सुरक्षा के लिए वक़्फ़ बोर्ड पूरी तरह से मूक-बधिर साबित हो रहा है। उनका कहना है कि किस तरह से हम सब को बेवकूफ बनाया जा रहा है।
पुरानी क़ब्रों से छेड़ छाड़ कर उन्के पटिये दोबारा साफ कर इस्तेमाल किए जाते हैं और नए पटियों के पैसे वसूले जाते हैं साथ ही साथ यह भी कहा कि क़ब्रों से निकली हड्डियों को क़ब्र खोदने वाले इधर उधर फेंक देते हैं जो क़ब्रों के लिए अपमान जनक है, समाज के साथ धोखा है जिस पर बोर्ड के ध्यान न देने की वजह से दिन प्रति दिन ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। जमीअत उलमा ने पूर्व में भी इन चीज़ों पर क़ब्रिस्तानों की सुरक्षा पर ध्यान आकर्षित कराया था जिसकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया जिससे क़ब्र खोदने वालों के हौसले बूलन्द होते जा रहें है ऐसे में क़ब्रिस्तानों में अब मरहुमीन भी असुरक्षित हैं।

भोपाल के क़ब्रिस्तानों में अब मरहूमीन भी नहीं हैं सुरक्षित | New India Times

क़ब्रिस्तानों की समितियों एवं मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड को इस और भी गौर करना चाहिए कि क़ब्रिस्तानों में पुरानी क़ब्रों से छेड़ छाड़ एवं क़ब्रिस्तानों में क़ब्र खोदने के नाम पर मन मानी राशि न वसूली जाए। उनका कहना है कि
मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड एवं क़ब्रिस्तानों की समिति द्वारा प्रतिबंध लगाकर क़ब्रिस्तानों में राशि सुनिश्चित की जाए जिससे क़ब्र खोदने वालों की मनमानी का शिकार ग़रीब परिवार न हों भोपाल में अधिकतर क़ब्रिस्तानों में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। बड़े बाग में बोहरा क़ब्रिस्तान के पीछे की बाउंड्री वाल टूट चुकी है रात्रि में क़ब्रिस्तान में अंधेरा पसरा है ये हाल पूरे भोपाल के क़ब्रिस्तानों का है जो दस बीस बचे हैं उनमें भी ऐसे अपमानजनक कार्य सामने आते हैं जिसकी ओर समाज के ज़िमेदारों को ध्यान देना चाहिए। जमीअत उलमा मध्य प्रदेश भोपाल वासियों से अपील करती है कि बन्द पड़े क़ब्रस्तानों में भी दफन की प्रक्रिया शुरू की जाए ताकि अतिक्रमणकारियों से उसको बचाया जा सके। हाजी इमरान ने कहा कि अगर बन्द पड़े क़ब्रिस्तानों पर समाज तव्वजो नही देता है तो वो दिन दूर नहीं जब दो ग़ज़ ज़मीं भी न मिलेगी जिस पर भूमाफियाओं की नज़र है। वहीं अवाम को अन्य मकबरों और भोपाल की ऐतिहासिक ईदगाह उसकी पार्किंग, अन्य मकबरों, विरासतों को बचाने के लिए भी प्रयास करना चाहिए और समय समय पर सफाई और सुरक्षा अभियान चलाना समय की बड़ी जरूरत है।

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