मेहलक़ा अंसारी, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

जिला प्रशासन की ओर से एक आदेश जारी होने एवं आग की तरह सोशल मीडिया पर वायरल होने से मुस्लिम समुदाय में भ्रम पूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई थी। यह चूक कैसे हुई यह जांच का विषय हो सकता था लेकिन प्रशासन की ओर से जहां संशोधित आदेश जारी किए जाने से स्थिति स्पष्ट हो गई वहीं शाही जामा मस्जिद बुरहानपुर के पेश इमाम हजरत सैय्यद इकराम उल्ला बुखारी एवं मस्जिद शनवारा गेट के पेश इमाम एवं सुन्नी विद्वान हजरत मौलाना मोहम्मद कलीम अशरफ हबीबी को आगे आकर सोशल मीडिया के माध्यम से अलग-अलग वीडियो संदेश देकर मुस्लिम समुदाय को समझाना पड़ा और कहना पड़ा कि ईद उल फितर की तरह ईद उल जुहा की नमाज मुस्लिम समाज जनों को घर पर ही अदा करना है। जिला प्रशासन के आदेश के अनुसार मस्जिद में केवल 5 लोग ही नमाज अदा करेंगे। मुस्लिम समाज जनों की तरफ से यह सवाल उठाया जा रहा है कि जिस प्रकार ईद के अवसर पर जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मुस्लिम धार्मिक उलेमाओं और प्रतिनिधियों को बार बार बुला कर उनसे परस्पर चर्चा की थी, बकरा ईद के समय जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उनसे चर्चा क्यों नहीं की ? जिला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा मुस्लिम धार्मिक उलेमाओं और प्रतिनिधियों से परस्पर चर्चा नहीं करने के कारण और एक आदेश जारी करने और संशोधित आदेश जारी करने से प्रशासन के साथ धार्मिक उलेमाओं पर भी उंगलियां उठ रही थी और ऐसी स्थिति में इस प्रतिनिधि के सुझाव पर धार्मिक विद्वानों द्वारा मुस्लिम समाज जनों के लिए वीडियो जारी कर के मुस्लिम समाज को समझाना पड़ा।
