सुल्तानगंज में घरेलू गैस की किल्लत से उपभोक्ताओं का हंगामा, ब्लैक मार्केटिंग के आरोप | New India Times

अतीश दीपंकर ब्यूरो चीफ, पटना (बिहार), NIT:

सुल्तानगंज में घरेलू गैस की किल्लत से उपभोक्ताओं का हंगामा, ब्लैक मार्केटिंग के आरोप | New India Times

भागलपुर जिले के सुल्तानगंज प्रखंड के लोगों को आज दूसरे दिन भी घरेलू रिफिलिंग गैस की काफी किल्लत होने पर उपभोक्ताओं ने हंगामा किया। मौके पर 112 की पुलिस पहुंची। वहीं इंडिया अनुराधा गैस गोदाम में दूसरे दिन घरेलू गैस सिलेंडर लेने वाले उपभोक्ताओं की काफी भीड़ देखी गई।

उपभोक्ताओं ने कहा कि सुबह नौ बजे से लंबी लाइन में खड़े हैं। पांच-छह घंटे बीतने को हैं, लेकिन घरेलू गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है, जबकि हम लोगों का डीएसी नंबर मिला है। बावजूद इसके गैस एजेंसी अनुराधा द्वारा गैस सिलेंडर नहीं दिए जा रहे हैं और न ही होम डिलीवरी की जा रही है। गैस सिलेंडर की भारी किल्लत होने पर लोगों ने हंगामा किया।

मौके पर उपभोक्ताओं ने गैस एजेंसी पर आरोप लगाते हुए कहा कि एजेंसी द्वारा सभी लोगों का गैस पासबुक लेकर दूसरे जगह लंबी लाइन लगवाकर कर्मचारी फरार हो गए। आक्रोशित उपभोक्ताओं ने 112 पुलिस को सूचना दी। मौके पर पुलिस पहुंची, जिसके बाद लंबी लाइन में लगे लोगों को गैस सिलेंडर दिया जाने लगा।

उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि अनुराधा गैस एजेंसी गैस सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग करती है और मनमानी करते हुए लोगों को परेशान कर रही है। ऐसे में एक-दो और इंडियन गैस एजेंसियों की आवश्यकता है, जिससे घरेलू गैस सिलेंडर लेने वाले लोगों को परेशानी न हो।

मामले को लेकर जब अनुराधा गैस एजेंसी के मैनेजर सुरज कुमार से पूछा गया तो उन्होंने टालमटोल करते हुए कहा कि जिनका डीएसी नंबर है, उन्हीं को गैस दिया जा रहा है। जिनका डीएसी नंबर नहीं मिला है, वे अपना खाता गैस गोदाम कार्यालय में अपडेट करा लें। डीएसी नंबर आने पर ही घरेलू गैस सिलेंडर दिया जाएगा। गैस की ब्लैक मार्केटिंग के आरोप पर उन्होंने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है।

इस दौरान दर्जनों गैस उपभोक्ता मौजूद थे।

सरकार और प्रशासन द्वारा यह हमेशा बताया जा रहा है कि गैस की किल्लत नहीं है। अगर गैस की किल्लत नहीं है, तो फिर गैस लेने के लिए इतनी लंबी लाइनें क्यों लग रही हैं, खासकर इस तपती धूप में?

भागलपुर के सुल्तानगंज में जो स्थिति बनी हुई है, उससे उपभोक्ताओं में आक्रोश है। आखिर कहीं न कहीं कुछ तो बात जरूर है।

देखने वाली बात यह होगी कि गैस की किल्लत से उपभोक्ताओं को कब छुटकारा मिलता है।

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