नरेंद्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

हर साल बढ़ रहा राजकोषीय घाटा और सरकारी उद्यम तथा जमीने गिरवी रखकर विश्व बैंको से लिए जा रहे हज़ारों करोड़ का ऋण महाराष्ट्र की जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ा रहा है। दूसरी ओर सरकार में बैठे मंत्रियों में एक एक मंत्री का अनुमानित काला धन 5 से 15 हजार करोड़ तक बताया जा रहा है! महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार पूरी तरह से केंद्र सरकार की मेहरबानी पर निर्भर हो चुकी है। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना के अधीन आ चुकी महात्मा फूले जन आरोग्य योजना को वैश्विक मंच से मिलने वाले स्वास्थ फंड के लिए जिंदा रखना राज्य सरकार की मजबूर बन चुका है। महाराष्ट्र सरकार की आर्थिक तंगी का आलम यह है कि उपजिला, जिला अस्पतालों में चलाए जा रहे मुफ्त महा-डायलिसिस केंद्र भविष्य में मुफ़्त नहीं रहेंगे। इन सेंटर्स द्वारा किडनी पीडित मरीजों को सूचित किया जा रहा है कि जल्द अपने राशन कार्ड को आयुष्मान योजना से जोड़ लें। सरकारी अस्पताल में मुफ़्त में दी जा रही तमाम सेवाओं के लिए सेवा शुल्क लागू कर दिया गया है। मोदी सरकार ने राज्य की जनता का सम्मान से जीने के अधिकार को भीख में बदल दिया है! मंत्री गिरीश महाजन का राजनीतिक कैरियर चमकाने में योगदान दे रहे आरोग्य क्षेत्र से जुड़े जामनेर के सरकारी अस्पताल को चार साल से प्रसूति विशेषज्ञ की प्रतिक्षा है।
महात्मा ज्योतिबा फूले योजना के नाम पर लुट

धूलिया में महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना के तहत डॉ पंकज देवरे के अस्पताल में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया गया है। सूचना अधिकार कार्यकर्ताओं ने देवरे के अस्पताल में दाखिल हर एक मरीज़ पर किए गए 5/6 ऑपरेशन के फर्जीवाड़े को उजागर किया है। सूत्रों से बताया जा रहा है कि कोरोना के समय राज्य सरकार पर लंबित 80 करोड़ रुपए के बिल अदा करने के बदले में नामचीन मंत्री ने जलगांव के एक मेडिकल कॉलेज को हथिया लिया है। नेताओं की ओर से मेडिकल फिल्ड में बढ़ती दिलचस्पी आखिर किस ओर इशारा कर रही है यह समझना जरूरी है।

