नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

सूखा और पीने के पानी की किल्लत से जूझ रहे बोदवड ब्लॉक के लोगों ने पानी की समस्या के समाधान की उम्मीद में विधायक तक बदल दिया, लेकिन आज भी उन्हें पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। यह रिपोर्ट जलगांव जिले के मुक्ताईनगर – बोदवड ब्लॉक की उस वास्तविक स्थिति को उजागर करती है, जिसे मुख्यधारा की मीडिया ने दिवाली विज्ञापनों के लालच में कभी सामने लाने की हिम्मत नहीं की।

साल 2014 से अब तक 11 वर्षों में गुलाबराव पाटिल जलापूर्ति मंत्री रहे और साढ़े आठ साल से गिरीश महाजन जलसंपदा मंत्री हैं, लेकिन लिफ्ट इरिगेशन की कोई भी महत्वपूर्ण परियोजना पूर्ण नहीं हो पाई।
मुक्ताईनगर के चांगदेव स्थित 10 टीएमसी क्षमता वाले हतनूर बांध के बैक वाटर से पानी को बोदवड तक लिफ्ट इरिगेशन के माध्यम से पहुंचाने की परियोजना प्रस्तावित है। इसके तहत बांध से पानी को पंप करके जमीन के भीतर लगभग 25 किलोमीटर लंबी कैनाल खोदकर 12 से 15 फीट परिधि वाली लोहे की पाइपलाइन बिछाई जानी है।
यह क्षेत्र कठोर काले पत्थर वाला होने की वजह से कैनाल निर्माण में ब्लास्टिंग करनी पड़ेगी। अनुमान है कि यह कार्य पूरा होने में 2 से 3 वर्ष का समय लग सकता है। लेकिन 2014 में इस परियोजना को गति देने के बजाय इसे जांच के नाम पर रोक दिया गया, जिसका परिणाम शून्य रहा।
2011 में लगभग 250 करोड़ रुपये की लागत से मंजूर जामनेर की वाघुर लिफ्ट इरिगेशन योजना आज भी अधर में अटकी हुई है। वहीं, इसके दूसरे चरण में बनने वाले समूह तालाब निर्माण कार्य भी ठंडे बस्ते में पड़े हैं। इन तालाबों के निर्माण में भ्रष्टाचार को लेकर भी गंभीर आरोप हैं, जिस पर हम जल्द ही अलग विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित करेंगे। इसी तरह, 2016 में शुरू किया गया भागपुर सिंचाई प्रोजेक्ट भी अब तक पूरा नहीं हो सका।
महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार में जलसंपदा विभाग के सैकड़ों प्रोजेक्ट्स सुधार और प्रशासनिक मंजूरियों के नाम पर साढ़े आठ साल तक अटके रहे। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सरकार ने विकास के नाम पर केवल घोषणाओं और प्रचार-प्रसार के अवसरों को प्राथमिकता दी? राज्य की इस स्थिति को सुधारने के लिए अब केंद्र सरकार से मार्गदर्शन और हस्तक्षेप की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

