संविधान की कसौटी पर फेल हुए निगम अध्यक्ष, विपक्ष ने की पद से हटाने की मांग | New India Times

जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

संविधान की कसौटी पर फेल हुए निगम अध्यक्ष, विपक्ष ने की पद से हटाने की मांग | New India Times

नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने सदन में वे सारे शब्द बोले, जिन्हें उन्होंने खुद नगर निगम की असंसदीय शब्दावली’ में प्रतिबंधित किया था। शबिस्ता ज़की नेता प्रतिपक्ष भाजपा नेताओं की आदत है कि हमें जो करना है कहना है कहेंगे क्योंकि कोई देखने सुनने वाला नहीं है ऐसा इन का मानना है और यही नियम खुद बनाए और खुद ही तोड़े। लेकिन बात सिर्फ शब्दों की नहीं मीटिंग में नगर निगम के एजेंडे में भी प्रस्ताव नहीं था।

संविधान की कसौटी पर फेल हुए निगम अध्यक्ष, विपक्ष ने की पद से हटाने की मांग | New India Times

एजेंडे में कहीं भी “भोपाल के नवाब” या “हमीदिया हॉस्पिटल हमीदिया स्कूल  स्कूल/कॉलेज” से जुड़ा कोई प्रस्ताव नहीं था, फिर भी एंटी मुस्लिम नफरत करने का जो इनका तरीका है वह यहां भी कानून का उल्लंघन किया गया। शासन प्रशासन से निवेदन है की निगम अध्यक्ष को तत्काल प्रभाव से अध्यक्ष पद से हटाया जाए क्योंकि यह गंभीर सवाल अपराध की श्रेणी में आता है।

चोरी-छुपे षड्यंत्रपूर्वक बिना पूर्व सूचना दिए एक पार्षद से यह प्रस्ताव पढ़वाकर पारित करवा लिया गया। यह न केवल नगर निगम अधिनियम की धारा 19(अ) का उल्लंघन है, बल्कि संविधान के मूल मूल्यों का भी सीधा अपमान है।

सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि अध्यक्ष पद की शपथ लेते समय  किशन सूर्यवंशी ने यह प्रतिज्ञा की थी “मैं विधिवत रूप से शपथ लेता हूं कि मैं सच्ची श्रद्धा और निष्ठा के साथ भारत के संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता रखूंगा, भारत की संप्रभुता और अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखूंगा, तथा अपने पद के कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक और ईमानदारी से निर्वहन करूंगा। लेकिन अध्यक्ष ने इस शपथ का खुला उल्लंघन किया है।

ऐसे में सवाल उठता है- क्या नगर निगम का सदन अब विकास की नहीं, नफ़रत की स्क्रिप्ट का मंच बन गया है?
जब अध्यक्ष स्वयं संविधान, नियम और मर्यादा की अनदेखी करें- तो फिर लोकतंत्र की रक्षा कौन करेगा ?
हम इस दोहरे मापदंड, संविधान के अपमान और संवैधानिक आसंदी के दुरुपयोग का कड़ा विरोध करते हैं।
•अध्यक्ष और संबंधित पार्षद को तत्काल पद से हटाया जाए।
•संवैधानिक मूल्यों की रक्षा सुनिश्चित हो।• सदन से विकास की आवाज़ उठाने के लिए हम लोग यहां पहुंचे हैं भाजपा जंनसघ के लोग नफ़रत ही फैला सकते हैं इसलिए बार-बार नाम बदलने के लिए यह प्रस्ताव लेकर आ रहे हैं।
•जनता सब देख रही है और अब सवाल भी करेगी
सबसे पहले अध्यक्ष खुद पर अनुशासन लागू करें।

By nit

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Gift this article