पत्रकारों का धरना प्रदर्शन सफल, मुख्यमंत्री से की गई पत्रकार सुरक्षा कानुन लागू करने की मांग, पूर्व सांसद, विधायक और कांग्रेस पार्टी ने दिया पत्रकारों को समर्थन | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

पत्रकारों का धरना प्रदर्शन सफल, मुख्यमंत्री से की गई पत्रकार सुरक्षा कानुन लागू करने की मांग, पूर्व सांसद, विधायक और कांग्रेस पार्टी ने दिया पत्रकारों को समर्थन | New India Times

मध्य प्रदेश में पत्रकारों पर हो रहे हमले और झाबुआ में पत्रकारों को साथ हुए प्रशासनिक दुर्व्यवहार के कारण सोमवार को जिलेभर के पत्रकारों ने जिला पत्रकार संघ के बैनर तले अपना आक्रोष व्यक्त करते हुए धरना प्रदर्शन किया। झाबुआ अम्बेडकर पार्क में जिले भर से सैकड़ों पत्रकारों ने आकर प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानुन लागु करने, प्रशासनिक दुर्व्यवहार सहित अन्य मांगों को लेकर आक्रोश व्यक्त किया।

पत्रकारों के धरना प्रदर्शन को कांग्रेस पार्टी का भी समर्थन
पूर्व सांसद एवं केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया, झाबुआ विधायक विक्रांत भूरिया कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रकाश रांका जिला संगठन मंत्री जसवंत भाबोर, शहर अध्यक्ष जितेंद्र राठौर, युवा नेता नर्वस अमलियार आदी कांग्रेसी नेता शामिल हुए।

झाबुआ विगत दिनों मुख्यमंत्री के झाबुआ आगमन के दौरान कलेक्टर और एसपी द्वारा पत्रकारों पर तल्ख टिप्पणी की गई थी जिससे पत्रकारों में आक्रोश व्याप्त हो गया। प्रशासनिक अधिकारियों के धमकी भरे अंदाज में की गई टिप्पणीयों कलमकारों का नागवार गुजरी जिसके चलते सोमवार को जिलेभर के पत्रकारों ने बड़ा धरना प्रदर्शन किया गया।

धरना प्रदर्शन को वरिष्ठ पत्रकार हरिशंकर पंवार ने संबोधित करते हुए कहा कि प्रशासन ओर पत्रकार दोनों को एक दुसरे के साथ की जरूरत है, उनसे हम लडाई नहीं कर सकते  लेकिन समाचार के माध्यम से भी यदि बात नहीं बनी तो हमें मजबूर होकर कलम डाउन करना पडेगी। उन्होंने कहा की पत्रकारो को भी गंभीरता से पत्रकारिता को करना चाहिए।

मनोज अरोरा ने कहा कि आज प्रशासनिक बेरूखी के कारण गांव- गांव से पत्रकार साथीयों को धरना प्रदर्शन में शामिल होने झाबुआ आना पड़ा, यह बड़े खेद का विषय है।

आलोक द्विवेदी ने कहा कि आज के ऐसे दौर में पत्रकारिता करना एक चुनौती हो गया है, प्रशासनिक अफसरों को पत्रकारों के प्रति सकारात्क रवैया रखना चाहिए, किंतु झाबुआ जिले में इसके विपरीत कार्यशैली अधिकारी अपना रहे हैं।

पत्रकार संघ के सरंक्षक संजय भटेवरा ने कहा की वर्तमान मे पत्रकार सुरक्षा कानून की काफी जरूरत है।

पंचायत स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक पत्रकारो पर हमले हो रहे और प्रशासन भी पत्रकारों पर निशाना साध रहा है।

उन्होंने कहा कि कलेक्टर झाबुआ द्वारा यह कहा जाना कि सब दुर केमरे लगा रखे हैं और कौन क्या कर रहा है हमें सब पता, काफी निराशजनक है। पुलिस अधीक्षक कहते है कि सब के इशु है, आखिर इसका मतलब क्या है।

ये अधिकारी पत्रकारों को अघोषित रूप से धमकाने की कोशिश कर रहे है जो असहनीय है,जिसका हर स्तर पर विरोध किया जायेगा।

बामनिया के सत्यनारायण शर्मा ने कहा की हमे अलग अलग गुटो मे बंटे हैं इसलिये प्रशासन हमें परेशान कर रहा है इसलिए हमें एकजुट होकर रहना चाहिए।

जिला पत्रकार संघ के अध्यक्ष राजेश सोनी ने कहा की प्रशासन अच्छी खबर की वाह वाही लुटता है लेकिन जब जनहित की खबर चलती है तो प्रशासन कार्यवाही की बात करता है।

राजेन्द्र सिंह सोनगरा ने कहा की पत्रकारों के सम्मान के लिए विरोध स्वरूप धरना प्रदर्शन जैसा कदम उठाना पड़ा ।

प्रशासन और पत्रकार एक सिक्के के दो पहुल है। दोनो जनता की मदद के लिए काम करते हैं, किंतु कई बार प्रशासन में बैठे अधिकारी आलोचनात्क खबरों को व्यक्तिगत लेकर पत्रकारों के प्रति द्वेष भाव रखते हैं जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए।

पत्रकार सरकार की योजनाओं को धरातल पर पहुॅचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है बावजूद यदि प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी यदि ऐेसा व्यवहार करेंगे तो पत्रकार हतोत्साहित होगा।

आलोक द्विवेदी ने कहा की प्रशासन पत्रकारो को सम्मान नहीं कर सकता तो कम से कम अपमान भी नहीं करें। 

पत्रकारो को जनाबूझ कर तारगेट बना रहे है यह गलत है और लोकतंत्र पर हमला करने जैसा है। साथ ही पत्रकारो को भी पत्रकारीता की लक्ष्मण रेखा पार नहीं करने की नसीहत दी।

मुज्ज्मील लाला ने कहा की पत्रकारों में वर्गवाद फैलाने कि कोशिश की जा रही है मगर जो ऐसा कर रहे हैं वे इसमें सफल नहीं होंगे। पेटलावद के विरेन्द्र भटट ने कहा की जल जीवन मिशन को खबर में कलेक्टर का सार्वजनिक वर्जन छापने पर पत्रकारों और संपादकों के माध्यम नोटिस तो दिला दिये , किंतु मेडम ने ठेकेदार और संबंधित एजेंसी पर कोई कार्यवाही नहीं की, इस तरह बर्ताव से प्रशासनिक अफसर क्या दिखाना चाहते हैं।

अब ऐसा दौर आ गया है कि जनता की हित के समाचर लिखना मतलब मुसीबत मौल लेना हो गया है।

विरेन्द्र राठौर ने कहा की झाबुआ जिले की पत्रकारीता कभी ना तो डरी है ना ही डरेगी  हमारी आवाज को जो जितना दबाने की कोशिश करेगा वो उतनी ही मुखरता से चलेगी। कलेक्टर मेडम कहती है कि केमरे से निगरानी हो रही है तो क्या सिर्फ पत्रकारो की ही हो रही है एसपी साहब कह रहे है पत्रकारो के इशु है, तो क्या सिर्फ पत्रकारो के ही इशु है।
कांग्रेस का मिला साथ
पत्रकारोें के आक्रोश और धरना प्रदर्शन को कांग्रेस पार्टी का भी साथ मिला।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री और वरिष्ठ आदिवासी नेता कांतिलाल भूरिया, झाबुआ विधायक और आदिवासी कांग्रेस के राष्टीय अध्यक्ष डाॅ. विक्रांत भूरिया, जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रकाश रांका,शहर कांग्रेस अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह राठौर, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि जसवंत भाबर ने पत्रकारों के धरना प्रदर्शन में शामिल हो कर , प्रशासन द्वारा पत्रकारों के साथ किए जो रहे दुव्र्यवहार की आलोचना की और प्रदेश सरकार से ऐसे जिम्मेदारों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की
झाबुआ विधायक और राष्टीय आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने कहा की  मध्यप्रदेश में अब पत्रकार सुरक्षित नहीं है।

सीधी, उज्जैन और अब झाबुआ में पत्रकारों को सच्ची खबरों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है, जो निंदनीय है। विक्रांत ने कहा कि प्रेस की आजादी पर हमला बर्दास्त नहीं किया जायेगा।

कांग्रेस पार्टी पत्रकारों के हितों की लड़ाई विधानसभा और विधानसभा के बाहर भी लडेगी।

पत्रकार जनता के हितों की बात करता है। सरकार पत्रकारों के माध्यम से अपनी योजना जरूरतमंदों तक पहुॅचाने में सफल होती है।

राजनैतिक दल अपनी बात जनता तक पहुॅचाने के लिए पत्रकारोें की मदद लेते हैं किंतु आज यदि झाबुआ जिले के पत्रकारों को धरना करना पड़ रहा है तो मतलब साफ है कि प्रदेश के हालत कितने बद से बद्तर होंगे । पत्रकारों की आवाज दबाई नहीं जा सकती
कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रकाश राका के साथ पूर्व केन्द्रीय मंत्री और पूर्व सांसद कांतिलाल भूरिया ने कहा की देश मे पत्रकारो की आवाज दबायी जा रही है। वर्तमान में झाबुआ प्रशासन न तो जनता की सुन रहा और न जनप्रतिनिधि की । भूरिया ने कहा कि अधिकारीयों को सरकार ने यह छुट दे रखी है कि जो भी सरकार के आलोचना करे , उनके खिलाफ कार्यवाही करे।

भूरिया ने कहा की अधिकारीयों को जनता के नुमांईदों के रूप में जनप्रतिनिधियों और पत्रकारो को सम्मान देना चाहिए।

कांग्रेस पार्टी पत्रकारों के सम्मान की लड़ाई में हमेशा उनके साथ खड़ी रहेगी।

धरना प्रदर्शन समाप्ती के बाद एसडी ने लिया ज्ञापन

पत्रकारों का धरना प्रदर्शन सफल, मुख्यमंत्री से की गई पत्रकार सुरक्षा कानुन लागू करने की मांग, पूर्व सांसद, विधायक और कांग्रेस पार्टी ने दिया पत्रकारों को समर्थन | New India Times

करीब तीन घंटे चले धरना प्रदर्शन के बाद प्रशासनिक अधिकारी के रूप झाबुआ एसडीएम भास्कर गाचले, तहसीलदार सुनील डावर धरना स्थल पर पहुॅचे। यहां महेश राठौर ने ज्ञापन का वाचन किया।

राधेश्याम पटेल, हरिशंकर पवार, अक्षक भट्ट, संजय भटेवरा, राजेश सोनी, सहित कई पत्रकारों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और 15 दिनों में ज्ञापन पर कार्यवाही की मांग की गई। जिले भर से बडी संख्या मे पत्रकारो ने धरना प्रदर्शन में शिरकत की। सफल संचालन राजेंद्र सोनगरा ने किया और झाबुआ पत्रकार संघ अध्यक्ष राधेश्याम पटेल ने आभार माना।

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