नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

मराठवाड़ा प्रादेशिक विभाग के अजंता पहाड़ियों में हो रही मूसलाधार बारिश के कारण पूर्वी जलगांव के जामनेर तहसील में बाढ़ की स्थिति बन गई है। मौसम विभाग के मुताबिक अजंता पहाड़ियों में 195 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की जा चुकी है। इन्हीं पहाड़ियों से निकलने वाली वाघुर, कांग, सोन नदियां उफान पर हैं। जामनेर ब्लॉक के सभी छोटे मोटे जलाशय पानी से भर गए हैं जिसके बाद नदियों का पानी वाघुर डैम में संकलित किया जा रहा है। सिंचाई विभाग ने भुसावल ब्लॉक के गांवों को रेड अलर्ट जारी करते हुए वाघुर डैम के दो दरवाजे खोल दिए हैं। जामनेर के तोंडापुर फत्तेपुर जिला परिषद गुट में केला बगानों में बाढ़ का पानी घुस गया है। पहुर में वाघुर किनारे बसे गांवों के सैकड़ों घर बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। जिलाधीश आयुष प्रसाद ने हिवरी दिगर, वाकोद पहुंचकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया।

फील्ड पर तैनात तहसीलदार नाना साहब आगले ने खंड अधिकारी विनय गोसावी से समन्वय स्थापित कर कई गांवों में राज्य आपदा सहायता बल का प्रबंधन करवाया है। शहापुर, मूंदखेड़ा से एक एक नागरिक के बह जाने की खबर को प्रशासन ने मीडिया से साझा किया है। बाढ़ से संबंधित खबरों को कवर करते हुए संत्री मीडिया ने “नेताजी के आदेश – निर्देश” के बाद प्रशासन की सजगता जैसी खबरों को जनता के बीच परोसकर पार्टी विशेष के लिए आपदा में अवसर पैदा किया है। 12 टीएमसी क्षमता वाले वाघुर डैम में 60% यानी 7 टीएमसी पानी पहले से मौजूद था। मराठवाड़ा क्षेत्र में हो रही झमाझम बारिश से 5 टीएमसी पानी का अतिरिक्त भंडारण हो कर वाघुर ओवर फ्लो हो चुका है। इसके पहले नदी और उनके नालों के जल प्रपात के माध्यम से 5 टीएमसी पानी छोटे छोटे तालाबों में जमा हो गया है। वाघुर डैम से छोड़ा जाने वाला पानी आगे मुख्य नदियों से हो कर अरब सागर में जा मिलेगा। नार-पार का चुनावी ढोल पीटने वाली सरकार के तमाम मंत्री गण समय रहते वाघुर लिफ्ट इरिगेशन प्रोजेक्ट को पूरा कर कार्यान्वित कर देते तो यही पानी जामनेर-पाचोरा ब्लॉक के 100 से अधिक गांवों के किसानों की खेती के लिए वरदान साबित होता। ज्ञात हो कि वाघुर लिफ्ट प्रोजेक्ट का काम 2011 से आज़ तक शुरू है जो पूरा नहीं हो सका है।

