नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

महाराष्ट्र के ग्राम विकास मंत्री गिरीश महाजन अपने गृह नगर जामनेर के जिस बंगले में रहते हैं उस बंगले समेत अन्य निजी संपत्तियों का सरकारी सड़क पर किए अतिक्रमण के मामले ने अचानक से तुल पकड़ लिया है। सामाजिक कार्यकर्ता जगदेव नारायण बोरसे ने जून 28, 2024 को जलगांव जिलाधीश को एक शिकायत प्रस्तुत की। शिकायत में कहा गया है कि बजरंगपुरा इलाके से नागरिकों ने 02/08/2004 को लोकशाही दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन को अनुरोध किया था कि सब्जी मंडी बजरंगपुरा यह संकरी गांवकोस सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।

13/12/2004 को जिलाधीश ने भूमी अभिलेख व मुख्याधिकारी नगर परिषद जामनेर को कार्रवाई हेतु मुआयने के लिए स्पॉट पर भेजा। उसके बाद निगम ने प्रस्ताव पारित कर विवादित सड़क के नक्शे को आधुनिक करने के लिए भूमी अभिलेख को नपाई चालान जमा कराया। 23/03/2005 को भूमी अभिलेख ने नक्शा निगम को सौंपा। निगम ने 30/40 संपत्ति धारकों को अतिक्रमण हटाने की नोटिस जारी की। किसी भी दोषी ने अतिक्रमण निकाला नहीं निगम ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए 20/11/2016 को पुलिस प्रशासन से सुरक्षा मांगी।
बस तब से लेकर अब तक पुलिस प्रोटेक्शन के अभाव से मामला फंसा है। बोरसे कहते हैं कि गांव कोस सड़क पर मंत्री गिरीश महाजन और नगराध्यक्ष साधना महाजन के निवासी बंगले का अतिक्रमण है जिसके चलते प्रशासन की ओर से अतिक्रमण उन्मूलन की सारी की सारी कार्रवाई रोकी गई है। बोरसे की शिकायत के बाद जिलाधिकारी कार्यालय ने नगर परिषद मुख्याधिकारी को आदेश दिए हैं कि मामले में नियमों के मुताबिक कार्यवाही कर प्रशासन को रिपोर्ट पेश की जाए।
मारपीट के आरोप में कोर्ट ने सुनाई आर्थिक रूप से सजा: किसान भगवान कांतिलाल राजपूत वाकडी निवासी ने अपने मवेशियों को खेतों में खुला छोड़ दिया। इस बात से गुस्साए वाल्मिक कोली, जगदीश कोली ने भगवान और उनकी पत्नी पर जानलेवा हमला किया दोनों को पत्थर और लाठियों से मारा पीटा। पीड़ित ने पहूर थाने में शिकायत दर्ज कराई, मुकदमें की सुनवाई के बाद अंतिम फैसले में जामनेर न्यायालय के न्यायाधीश श्री भुषण काले ने अपने लिखे आदेश में कहा कि दोनों आरोपी पीड़ितों को 10 हज़ार रुपए बतौर हर्जाना अदा करे।
दोनों आरोपी कोर्ट के सामने एक साल के लिए 15 हजार रुपए का सुशील चरित्र परायणता का बॉन्ड पेश करे। सरकार पक्ष की ओर से एडवोकेट अनिल सारस्वत, सहायक सरकारी वकील एडवोकेट कृतिका भट् ने पैरवी की। इस मुकदमे में कुल 10 गवाहों के बयान परखे गए। पुलिस जवान मनोज बाविस्कर, अविनाश पाटील ने न्यायिक कामकाज में योगदान दिया।

