रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी/पंकज बडोला, झाबुआ (मप्र), NIT:

संसार कलर बॉक्स के समान है जितना भी अच्छा जमाओ पुनः बिगड़ जाता है अनादि काल से संसार में हम सभी से रिश्ता अच्छा रखने की कोशिश कर रहे है परंतु पुनः बिगड़ जाता है इससे बचने के लिये विषयों के प्रति रूचि कम करना इच्छा को सिमित करना पड़ेगी ओर अपनी समझ को सुधारना पड़ेगी धर्म के नाम पर हो रही हिंसा को रोकना होगा जिसके घट मे अहिंसा होती है देवता भी उसको नमस्कार करते है।
तपस्या के निमित्त अहिंसा का पालन होता है आजकल धर्म के नाम पर मनोरंजन ज्यादा बढ़ गया है उक्त उदगार पूज्य सुभेष मुनीजी ने अणु स्वाध्याय भवन में फरमाये बाल तपस्वी प्रीत चन्दन गोलेच्छा की 8 उपवास की तपस्या के अनुमोदन दिवस पर पूज्य संयत मुनीजी ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा एक बार साधना करने से कोई साधक नहीं बन जाता उसके लिये धैर्य रखना पड़ता है बार बार साधना करनी पड़ती है संसार के कार्यों मे भी धैर्य जरुरी है खाना गर्म हो तो उसमे भी धैर्य की जरुरत है व्रत पालन में दृड़ता रखेंगे तो अच्छा है जो पुनवान होते है उनकी चिंता ज्यादा नहीं रहती अपने 85 उपवास की दीर्घ तपस्वीनी मालवा डूंगर की शान तप चक्ररेशवरी स्नेहलता वागरेचा नें प्रत्याख्यान ग्रहण किये प्रभावना चन्दन फतेचंद्र गोलेच्छा द्वारा वितरित की गई प्रीत का बहुमान संघ एवं वरिष्ठ श्रावक यशवंत बाफना ने 8 उपवास की बोली से बहुमान किया संचालन विपुल धोका ने किया।
