अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:

मध्यप्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं लेकिन उसके बावजूद शिवराज सरकार द्वारा छात्र-छात्राओं को टेस्टिंग किट समझ कर उनकी ऑफलाइन परीक्षा आयोजित करवाने की तैयारी की जा रही है जिस का स्टूडेंट्स लगातार विरोध कर रहे हैं।
एनएसयूआई मेडिकल विंग के प्रदेश समन्वयक रवि परमार ने बताया कि मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा लगातार मनमानी की जा रही है एक ओर छात्र-छात्राएं कोरोना को लेकर अत्यधिक चिंतित हैं तो वहीं दूसरी ओर ऐसी भयावह स्थिति में ऑफलाइन परीक्षा करवाई जा रही हैं जिसका छात्र-छात्राएं ओर उनके अभिभावक लगातार विरोध कर रहे हैं।
रवि ने बताया कि आज ऑफलाइन परीक्षा के विरोध में मेडिकल विश्वविद्यालय के सभी छात्र छात्राओं ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सांरग को हजारों की संख्या में ट्वीट किये है स्टूडेंट्स ने ट्वीट में अपनी बात रखते हुए मेडिकल स्टूडेंट्स की मन की बात सुनो मामा हमारे_साथ का हजारों स्टूडेंट्स ने ट्वीटर पर हैशटैग चलाया.

परमार ने बताया की मेडिकल यूनिवर्सिटी के नर्सिंग, फिजियोथैरेपी, होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक, यूनानी एमबीबीएस, डेंटल, पैरामेडिकल और अन्य मेडिकल कोर्स के स्टूडेंट्स द्वारा ऑफलाइन परीक्षा का लगातार विरोध कर जनरल प्रमोशन या ऑनलाइन परीक्षा की मांग की जा रही है। मेडिकल स्टूडेंट्स की मांग जायज है एनएसयूआई द्वारा इसका पूर्ण समर्थन भी किया जा रहा है.
परमार ने कहा कि मेडिकल यूनिवर्सिटी की लापरवाही की वजह से हजारों स्टूडेंट्स का भविष्य खतरे में है यूनिवर्सिटी द्वारा ना तो समय पर परीक्षा परिणाम जारी किये जाते हैं ना ही मार्कशीट डिग्री प्रोविजनल समय पर दी जाती हैं नर्सिंग अंतिम वर्ष की परीक्षा फरवरी 2020 में हुई थी लेकिन कई स्टूडेंट्स के परीक्षा परिणाम एक साल बाद भी जारी नहीं किये जिसकी वजह से जिन स्टूडेंट्स को डिग्री लेकर नौकरी करना चाहिए थी आज वो परीक्षा परिणाम के इंतजार में घर में बैठे हैं.
रवि परमार का कहना है कि मेडिकल यूनिवर्सिटी के कई कोर्सओं की सत्र 2019- 20 की परीक्षा काफी समय पहले हो जानी थी लेकिन अभी तक नहीं हुई जिससे छात्र छात्राओं का समय बर्बाद हो रहा है और अब ऐसे हालातों में परीक्षा कराना उचित नहीं है इसलिए छात्र छात्राओं को या तो जनरल प्रमोशन दिया जाए या फिर जल्द से जल्द उनकी ओपन बुक या ऑनलाइन परीक्षा करवाई जाएं.
परमार ने कहा प्रदेश के हालात बहुत गंभीर है ऐसे में छात्र छात्राओं कि ऑफलाइन परीक्षा कराना यानी कोरोना को ओर फैलाना है अगर छात्र-छात्राएं संक्रमित हुए तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी ना विश्वविद्यालय जिम्मेदारी लेने को तैयार है ना ही सरकार जिम्मेदारी लेने को तैयार है तो आफलाइन परीक्षा क्यों?
रवि परमार ने कहा कि नर्सिंग के छात्र-छात्राएं लगातार जनरल प्रमोशन की मांग कर रहे लेकिन सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है लेकिन अब नर्सिंग के छात्र-छात्राएं जनरल प्रमोशन की मांग को लेकर एनएसयूआई मेडिकल विंग के साथ हाईकोर्ट जाएंगे.
एनएसयूआई ने चेतावनी दी कि अगर जल्दी छात्राओं के स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर उचित निर्णय नहीं लिया गया तो एनएसयूआई उग्र प्रदर्शन करेगी.
