जब श्राप बना वरदान: आचार्य पंडित नरेश शर्मा | New India Times

रहीम शेरानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

जब श्राप बना वरदान: आचार्य पंडित नरेश शर्मा | New India Times

झाबुआ जिले के मेघनगर में बड़े उत्साह एवं धूमधाम से से चल रही राम कथा के चौथे दिन के यजमानज पलक दर्पण पंचाल द्वारा राम दरबार की विधिवत पूजा अर्चना की गई।
रामकथा को आगे बढ़ाते हुए आचार्य पंडित नरेश शर्मा द्वारा राम अवतार का प्रयोजन के बारे में विस्तृत से बताया गया जब भी धर्म की हानि होती है तब तब ईश्वर को अवतार लेकर अधर्म का नाश और धर्म की ध्वजा पूरे विश्व में कायम करते हैं आचार्य जी ने बताया की राजा दशरथ को जो श्राप मिला था वह वरदान में बदल गया भक्त राज्य श्रवण कुमार द्वारा मात-पिता भक्ति के चलते अपने प्राण गवा ना पड़े श्रवण कुमार के माता-पिता ने निसंतान राजा दशरथ को श्राप दिया की पुत्र वियोग में हम अपने प्राण छोड़ रहे हैं वैसे ही राजा दशरथ आप भी पुत्र योग में अपने प्राण छोड़ेंगे पश्चात राजा दशरथ के यहां भगवान राम ने पुत्र रूप में जन्म लिया राम जन्म के अवसर पर आज महिलाएं ने बड़े उत्साह से फूलों की वर्षा करते हुए राम लल्ला का अभिनंदन कर रही थी कथा में गोविंद पंचाल एवं परिवार द्वारा रामलला का नखरा लिया गया।

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कथा में विशेष रूप से मसूरज गुमान सिंह डामोर सांसद एवं आरती भानपुरिया कथा श्रवण का लाभ लिया पंडाल को संबोधित करते हुए श्रीमती सूरज गुमान सिंह डामोर साईं मंदिर महिला मंडल का आभार व्यक्त किया कि जिन्होंने हमें कथा में बुलाया पूरे जिले में मेघनगर मैं ही धार्मिक आयोजन होते रहते हैं साईं मंदिर महिला मंडल द्वारा यह पांचवा धार्मिक आयोजन जानकर उन्होंने सभी महिलाओं को साधुवाद दिया तथा आचार्य पंडित नरेश शर्मा का अभिवादन किया पूरा देश राम में हो रहा है तो महिला मंडल की यह अनूठी पहल राम कथा आयोजन सुनहरी अक्षरों में लिखा जाएगा आरती भानपु रिया द्वारा पंडाल को संबोधित करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है की यह रामकथा का आयोजन महिलाओं द्वारा हो रहा है प्रेमलता भट्ट द्वारा अतिथियों का सम्मान किया गया  कल राम विवाह होगा  एवं राम और सीता का चरित्र का वर्णन किया जाएगा हम कैसे राम और सीता के  पद चिन्हों पर चल सके कथा में मदरानी काकनवानी रंभा पुर अग राल भगोर थांदला आदि आसपास के गांव से कथा श्रवण के लिए भक्त लोग पधार रहे हैं आज सभी महिलाएं पीले वस्त्र में कथा श्रवण कर रही थी ऐसा लग रहा था की बसंत पंचमी आज ही बनाई जा रही है।

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