फुट तालाब महाकुंभ का भव्य समापन, हजारों श्रद्धालुओं की उमड़ी आस्था, अन्य राज्यों से भी पहुंचे श्रद्धालु, पप्पू भैया मित्र मंडल ने किया सम्मान | New India Times

रहीम शेरानी हिंदुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

फुट तालाब महाकुंभ का भव्य समापन, हजारों श्रद्धालुओं की उमड़ी आस्था, अन्य राज्यों से भी पहुंचे श्रद्धालु, पप्पू भैया मित्र मंडल ने किया सम्मान | New India Times

मध्य प्रदेश के मेघनगर स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल श्री वनेश्वर मारुति नंदन हनुमान मंदिर, फुट तालाब में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह का शनिवार, 16 मई को सनातन महाकुंभ के रूप में भव्य और भावनात्मक समापन हो गया। 10 मई से प्रारंभ हुई इस कथा का वाचन पंडित कमल किशोर नागर द्वारा किया गया, जिसे सुनने के लिए हजारों श्रद्धालु दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचे।
भीषण गर्मी के बावजूद मध्य प्रदेश के झाबुआ, रतलाम, उज्जैन, बड़वानी और धार जिलों के साथ-साथ आलीराजपुर, गुजरात और राजस्थान से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु फुट तालाब पहुंचे। श्रद्धालुओं ने हनुमान जी के दर्शन कर आस्था प्रकट की और कथा श्रवण कर धर्म लाभ लिया।
आयोजन समिति के वरिष्ठ सदस्य एवं समाजसेवी सुरेश चंद्र पूरणमल जैन और राजेश रिंकू जैन द्वारा श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क बस, शीतल जल और अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं, जिससे आयोजन सुव्यवस्थित और सफल रहा। कथा के दौरान पंडित नागर के भजनों पर श्रद्धालु भक्ति भाव में सराबोर होकर झूमते नजर आए।
समापन अवसर पर महंत दिलीप दास महाराज, रामदास त्यागी (टाट वाले बाबा) सहित आयोजन समिति के सदस्यों ने सभी श्रद्धालुओं और संतों का आभार व्यक्त किया। सुरेश चंद्र पूरणमल जैन ने अपने संबोधन में कहा कि फुट तालाब के प्रति लोगों की आस्था लगातार बढ़ रही है और इतनी बड़ी संख्या में अनुशासित श्रद्धालुओं की उपस्थिति आयोजन की सफलता का प्रमाण है।
पंडित कमल किशोर नागर ने अपने प्रवचन में कहा कि श्रीमद् भागवत कथा मनुष्य को आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देती है और पारिवारिक व सामाजिक मूल्यों को सुदृढ़ करती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कथा के विचारों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर पप्पू भैया मित्र मंडल द्वारा समाजसेवी सुरेश चंद्र पूरणमल जैन और राजेश रिंकू जैन का प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। मंडल के सदस्यों ने कहा कि क्षेत्र में धार्मिक आयोजनों के माध्यम से सनातन संस्कृति को मजबूत बनाने में जैन परिवार का योगदान सराहनीय है।

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