नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:
जलगांव जिले की वाघूर लिफ्ट योजना के कई चरणो के बीच वर्तमान में शुरू पहले फेज के कामकाज को लेकर कंस्ट्रक्शन कंपनी की ओर से बरती जा रही गोपनीयता पर गंभीर सवाल उठने आरंभ हो गए हैं।GVPR कंपनी ने प्रशासन को अपने प्रभाव में ले लिया है।वाघूर इरिगेशन विभाग के आला अधिकारियो का काम बस इतना बचा है कि सिंचाई मंत्री गिरीश महाजन के साथ मुसाफा होने के बाद वे प्रॉजेक्ट प्रोग्रेस को लेकर मंत्री जी को ब्रीफ करे।

12 टीएमसी क्षमता के वाघूर डैम मे बचने वाले 09 टीएमसी पानी को कृषि सिंचाई के लिए तालाबो मे डालकर किसानो के खेतो तक पहुंचाया जाना है । तीस लाख लीटर क्षमता का एक तालाब ऐसे 3800 तालाब बनने है जिनमे से 1200 बनकर तैयार है। किसी भी तालाब के पास सूचना बोर्ड नही है ।तालाबो के Gio टैगिंग को लेकर स्पष्टता नही , तालाबो की मिट्टी की दीवारो को बाहर से पिचिंग नहीं है। प्रोजेक्ट की सारी सफलता गुरुत्वाकर्षण बल पर निर्भर जमीन के अंदर बिछाई पाइप लाइन पर आधारित है। प्रॉजेक्ट के Measurement Book’s

और जमीनी हकीकत के बीच अंतर की निरंतरता बढ़ रही है ।एक हजार करोड़ रुपए से अधिक के इस प्रोजेक्ट के बारे मे सिंचाई विभाग की ओर से बरती जा रही रहस्यमई गोपनीयता भविष्य मे बड़े भ्रष्टाचार को तो संरक्षण नही दे रही है ? आम जनता यह मांग कर रही है कि इस प्रोजेक्ट के जमा खर्चे के बारे मे समय समय पर सार्वजनिक रूप से जन संवाद किया जाए। अन्यथा वाघूर विभाग को जलगांव PWD बनते देर नही लगेगी।
घूसखोर अभियंता ने बांटा लाखो रुपया :
पांच लाख रुपए की रिश्वत लेते पकडे गए जलगांव PWD के ब्रांच इंजीनियर योगेश अभिमन्यु अहीरे के पीछे छुप रहे सीनियर कार्यकारी अभियंता की ओर से गोदी मीडिया को जमकर मिठाई बांटने की खबरे है ।सूत्रो के मुताबिक इस अभियंता ने एक मल्टीपल प्रोजेक्ट मे भ्रष्टाचार कर करोड़ो रुपए का ब्लैक मनी कमाया है ! एंटी करप्शन विभाग और अन्य आधिकारिक सोर्स से अहीरे के आका की पहचान साबित होने की उम्मीद है।

