विश्व पुस्तक दिवस पर कार्यक्रम संपन्न, एडवोकेट मयूरी धानक ने पुस्तकों के महत्व पर दिया जोर | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी/पंकज बड़ोला, झाबुआ (मप्र), NIT:

विश्व पुस्तक दिवस पर कार्यक्रम संपन्न, एडवोकेट मयूरी धानक ने पुस्तकों के महत्व पर दिया जोर | New India Times

थांदला में विश्व पुस्तक दिवस के अवसर पर आयोजित साप्ताहिक पखवाड़ा कार्यक्रम का समापन हुआ। यह कार्यक्रम एमजी रोड स्थित कंचन सामाजिक सेवा संस्थान, संपूर्ण भारत भारतीय गौरक्षा वाहिनी एवं भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रधान कार्यालय में आयोजित किया गया।

विश्व पुस्तक दिवस पर कार्यक्रम संपन्न, एडवोकेट मयूरी धानक ने पुस्तकों के महत्व पर दिया जोर | New India Times

कार्यक्रम में संस्था की राष्ट्रीय संचालक, मालवा प्रांत महाधिवक्ता, महिला परिषद अध्यक्ष एडवोकेट कुमारी मयूरी धानक, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष वर्षा संजय परमार, गोरक्षा प्रदेश महामंत्री, अजा मोर्चा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य एवं पार्षद राजू धानक, गोरक्षा जिला अध्यक्ष मोहनलाल यादव, गो भक्त टिटू बैरागी, गो भक्त नटवरलाल धानक सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

इस दौरान बच्चों को महान क्रांतिकारियों, जननायकों और साहित्यकारों की धार्मिक एवं सामान्य ज्ञान से संबंधित पुस्तकों का वितरण किया गया।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता एडवोकेट मयूरी धानक ने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए आत्मा की शुद्धता और ज्ञान आवश्यक है। साहित्य, चाहे वह धार्मिक हो या सामान्य ज्ञान से संबंधित, हमें सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

कार्यक्रम के पश्चात सभी ने झाबुआ के ग्राम पंचायत गोपालपुरा स्थित ब्रह्माकुमारी आश्रम पहुंचकर गुरु दीदी से सौजन्य भेंट की और माउंट आबू में चल रहे सम्मेलन पर चर्चा की।

इसके बाद रंभापुर स्थित सैय्यद हज़रत गैबन शाह वली की दरगाह शरीफ पर आयोजित आठवें उर्स मुबारक में भी शामिल हुए, जहां कव्वाली कार्यक्रम का आयोजन देर रात तक चलता रहा।

उर्स के अवसर पर क्षेत्रीय विधायक वीरसिंह भूरिया ने 21 हजार रुपये का नजराना पेश किया। इस मौके पर विधायक प्रतिनिधि एवं वरिष्ठ पत्रकार कादर शेख, भारतीय पत्रकार संघ के जिला महामंत्री रहीम शेरानी, थांदला के पार्षद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता राजू धानक, बंटी खान सहित अन्य लोगों ने सूफी संतों का स्वागत कर गंगा-जमुनी तहजीब और एकता का परिचय दिया।

इस कार्यक्रम में झाबुआ, राणापुर, थांदला, कुशलगढ़, बांसवाड़ा, खाचरोद, उज्जैन, रिंगनोद, दाहोद और धार सहित कई क्षेत्रों से बड़ी संख्या में जायरीन शामिल हुए।

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