नरेंद्र कुमार, जामनेर/जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

“तोड़ दो सब कुछ ये लोग फिर से खड़े नहीं होने चाहिए” अतिक्रमितों के प्रति इस द्वेषपूर्ण संवाद को दोहराते हुए नगर परिषद के अतिक्रमण हटाव दस्ते ने गरीबों के ठेले, टिन बॉक्स बुलडोजर से कुचलकर अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर प्रशासनिक तानाशाही का परिचय दिया. इस तोड़ू कार्रवाई में लाखों रुपयों की निजी संपत्ती बर्बाद कर दी गई. बताया जाता है कि गांधी चौक से जकात नाके तक एक करोड़ की लागत से बनने जा रही 500 मीटर कांक्रीट सड़क निर्माण के लिए नगर परिषद द्वारा सामाजिक संतुलन साधने की जुगत में इस मुहिम का आयोजन किया गया था. मुहिम को लेकर तमाम कानूनी बातों को पूरा कर लिया गया लेकिन बिना कोई जब्ती, जुर्माना, फौजदारी के बुलडोजर से इंसाफ कर देने की सनक प्रशासन के भीतर उत्तर प्रदेश से तो नहीं आई, ऐसा सवाल पूछा जाने लगा है. वैसे भी पाचोरा Y Point सर्कल पर निगम द्वारा बिठाए गए मिलिट्री टैंक से प्रसारित होने वाले संदेश को लोकतंत्र के नजरिए से सोचना और समझना भक्तों को जटिल होगा. अतिक्रमण उन्मूलन मुहिम के नाम पर नगर परिषद द्वारा किए गए अन्याय को लेकर इंसाफ के लिए किसी भी पीड़ित के कोर्ट जाने की कोई गुंजाइश फिलहाल नहीं है. आज 400 परिवारों की रोजीरोटी छीन चुकी है, अभिनेता से नेता फिर लोकनेता बने शख्स ने पीड़ितों की कोई सुध नहीं ली है ऐसा करना उस नेता की शान में गुस्ताखी की तौर पर देखा जा सकता है.
उक्त मामले में नगर परिषद प्रशासन के कार्रवाई की उच्च स्तरीय जांच कर निजी संपत्ती की भरपाई की मांग की जा रही है.
