कोरोना गाइड लाइन के नियमों की धज्जियां उड़ाता प्राइवेट स्कूल, बच्चों को फ़ीस के लिए बाहर बैठाया, अभिभावकों को उठानी पड़ रही है शर्मिंदगी तो बच्चों की मानसिकता पर पड़ रहा है विपरीत प्रभाव | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

कोरोना गाइड लाइन के नियमों की धज्जियां उड़ाता प्राइवेट स्कूल, बच्चों को फ़ीस के लिए बाहर बैठाया, अभिभावकों को उठानी पड़ रही है शर्मिंदगी तो बच्चों की मानसिकता पर पड़ रहा है विपरीत प्रभाव | New India Times

देश में शिक्षा का अधिकार अनिवार्य कानून लागू है इस कानून का मुख्य उद्देश्य गरीब से गरीब वर्ग के व्यक्ति को शिक्षा से वंचित नहीं रखा जाए वहीं पिछले 2 वर्षों से कोरोना के चलते शिक्षा एवं बच्चों की पढ़ाई पर विपरीत असर पड़ा है।

समय-समय पर शासन प्रशासन और प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान के द्वारा कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।

अभिभावकों को उठानी पड़ रही है शर्मिंदगी

वहीं बच्चों की पढ़ाई और उनसे वसूली जाने वाली फीस को लेकर भी सरकार के द्वारा कई प्रकार के निर्देश दिए हैं. एक तरफ कोरोना कॉल के चलते लोगों के काम धंधे बंद हैं वहीं बच्चों को पढ़ाना उनकी जिम्मेदारी है और इस जिम्मेदारी का निर्वहन करते करते माता-पिता को कई बार स्कूलों की मनमर्जी और हठधर्मिता के कारण शर्मिंदगी भी उठाने पड़ती है।

ऐसा ही एक और वाक्या पेटलावद में देखने को मिला है. राईपुरिया मार्ग पर स्थित संस्कार वैली पब्लिक स्कूल में बड़ी संख्या में सारंगी तथा क्षेत्र के बच्चे पढ़ते है। जिसमें से अधिकतर बच्चे मध्यम वर्गीय परिवार से आते है। जिसके कारण अधिकतर छात्र- छात्राओं के परिजन लॉकडाउन से उबर न पाने के कारण फीस जमा नहीं कर सके थे जिसके कारण बच्चो को बाहर बैठाया गया ओर शाशन की गाईडलाइन का भी पालन नही किया गया और संस्कार वैली पब्लिक स्कूल में कोराना की गाइड लाइन के उल्लंघन का महज एक उदाहरण है। सब स्कूलों में यही हाल है।

मास्क लगाना तो दूर दो गज की दूरी भी नहीं है। जिम्मेदार एक को देखकर दूसरे भी कोरोना की गाइडलाइन को भूलते जा रहे हैं।

पालकों ने कहा कि सरकारी स्कूलों के हाल बेहाल हैं।
इसलिए अभिभावक ऊंची फीस जमा करके अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य देखकर निजी स्कूलों में दाखिला करवाते हैं,

लेकिन सरकारी तंत्र की चूक ने इन स्कूलों को सिर्फ रुपए की उगाही का केंद्र बनाकर सीमित कर दिया।

शिक्षा का स्तर कितना नीचे जाए इससे निजी स्कूल संचालकों को फर्क नहीं पड़ता। ऐसा ही एक मामला पेटलावद की स्कूल में देखने मिला। स्कूल के विद्यार्थियों को इस सत्र की फीस जमा नहीं करने पर बाहर बैठाया।

बच्चों की मानसिकता पर विपरीत प्रभाव

इस तरह से निजी विद्यालयों के द्वारा मनमर्जी से फीस वसूली के लिए अभिभावकों और बच्चों को परेशान करने के साथ ही साथ पढ़ाई के लिए बमुश्किल गए बच्चों को स्कूल से बाहर बिठाने से न सिर्फ बच्चों की मानसिकता पर विपरीत असर गिर रहा है वहीं अभिभावकों को भी शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है।

By nit

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Gift this article