आदिवासी संगठन जयस व नारी शक्ति सुमित्रा मेडा की मेहनत लाई रंग, कर्नाटक में बंधक बनाए गए आदिवासी मजदूरों को प्रशासन की मदद से छुड़वाया गया | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

आदिवासी संगठन जयस व नारी शक्ति सुमित्रा मेडा की मेहनत लाई रंग, कर्नाटक में बंधक बनाए गए आदिवासी मजदूरों को प्रशासन की मदद से छुड़वाया गया | New India Times

झाबुआ जिले के करीब 7 गांव के गरीब आदिवासी मजदूर जो गन्ना काटने के काम को लेकर कर्नाटक राज्य की ओर पलायन पर गए थे. गरीब आदीवासी मजदूरों को झाबुआ के ही फर्जी ठेकेदार के द्वारा ₹400 की दैनिक मजदूरी देने का लालच देकर कर्नाटक राज्य के दबंग कुख्यात सेठ साहूकार के गन्ने का खेत कटवाने के लिए लेकर गए थे लेकिन वहां पर उन लोगों ने आदिवासी समाज के गरीब मजदूरों को बंधक बनाकर जबरन जोर जबरदस्ती बल का प्रयोग करते हुए अधिक काम कराया जा रहा था और तरह-तरह की यातनाएं और प्रताड़ित कर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जा रहा था. मजदूरों ने मोबाइलों के द्वारा अपने घर परिवार वालों से संपर्क किया, उनके घर वालों ने आदिवासी समाज के सामाजिक कार्यकर्ताओं जयस व भील प्रदेश के कार्यकर्ताओं से संपर्क किया.

आदिवासी संगठन (जयस) ने तुरंत झाबुआ एसपी, कलेक्टर, श्रमिक ऑफिस कार्यालय में जाकर इन परिवारों की परेशानी से अवगत कराया. कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने तत्काल एक्शन लेते हुए श्रमिक विभाग को निर्देश दीया कि कर्नाटक में फंसे आदिवासी समाज के मजदूरों को लेने के लिए एक टीम का गठन कर कर्नाटक जाने की तैयारी करें. बस फिर क्या था श्रमिक विभाग की टीम आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ताओं को लेकर कर्नाटक की ओर रवाना हो गए. जयस व नारी शक्ति सुमित्रा मेडा ने अपनी टीम के साथ लगातार 2 दिन तक प्रयास किए थे जिसका परिणाम यह रहा कि प्रशासन ने इस मामले को लेकर अपनी गंभीरता दिखाते हुए तत्काल एक्शन लिया व कर्नाटक राज्य से आदिवासी गरीब मजदूरों को मेघनगर सामाजिक टीम को साथ लेकर छुड़वाने में सफल रहे.

नारी शक्ति सुमित्रा मेडा, भील प्रदेश के सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश वसुनिया, जयस अध्यक्ष माधु सिंह डामोर सहित बड़ी संख्या में आदिवासी संगठन के कार्यकर्ता उपस्थित थै.

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