सब इंस्पेक्टर मनीष मिश्रा के जीवन की अद्भुत कहानी, भिखारी के रूप में मिले सब इंस्पेक्टर को उनके सहकर्मियों ने याद दिलाया उनका पूर्व समय | New India Times

संदीप शुक्ला, ब्यूरो चीफ, ग्वालियर (मप्र), NIT:

सब इंस्पेक्टर मनीष मिश्रा के जीवन की अद्भुत कहानी, भिखारी के रूप में मिले सब इंस्पेक्टर को उनके सहकर्मियों ने याद दिलाया उनका पूर्व समय | New India Times

अपने पुराने दोस्तों से मिलने के बाद कभी शार्प शूटर और थानेदार रहे मनीष मिश्रा की ज़िंदगी वापिस पटरी पर लौटने लगी है। मनीष दस नवम्बर की रात कचरे के ढ़ेर से सामान ढूंढते और ठंड से सिकुड़ते पुलिस अफसरों को दिखा था। उसने उन अफसरों को नाम से पुकार कर चौंकाया था कि वह उनके साथ का ही थानेदार है इसके बाद वे लोग उसे उपचार कराने ले गए। दीवाली मनाने उसके सारे बैचमेट जब साथ पहुंचे तो उसने सबको पहचान लिया।
10 साल बाद गुमनामी के अंधेरे से बाहर आए दरोगा मनीष मिश्रा की जिंदगी भी अब पटरी पर लौटने लगी है। वह स्वर्ग सदन आश्रम में रह रहा है। मनीष अब अपने पुराने साथियों को पहचानने लगा है और बीते दिनों की बातें भी याद कर रहा है। दीवाली की रात मनीष मिश्रा से मिलने के लिए उनके बैच के 6 टीआई स्वर्ग सदन आश्रम पहुंचे। ग्वालियर के थाना प्रभारी आसिफ मिर्जा बेग, EOW इंस्पेक्टर सतीश चतुर्वेदी, टीआई राम नरेश यादव, सतीश भदोरिया, पंकज द्विवेदी स्वर्ग सदन आश्रम पहुंचे और मनीष मिश्रा से मुलाकात की। मनीष ने एक के बाद एक सभी को पहचान लिया और फिर पुराने दिनों की बातें निकल आईं। मनीष ने उस दौर में अपने साथ रहे थाना प्रभारियों से पुलिसिंग को लेकर बातचीत की और अपने पुराने दिन भी याद किए। इस दौरान मनीष मिश्रा को अपने एक और बेच मेट शिव सिंह की याद आई तो उन्होंने आसिफ मिर्जा बेग से शिव सिंह के बारे में पूछा। आसिफ ने मनीष को बताया कि शिव सिंह इन दिनों भिंड जिले के मेहगांव थाने में टीआई है। मनीष की इच्छा पर आसिफ ने फोन से वीडियो कॉल के जरिए शिव सिंह से बात कराई। मनीष ने शिवसिंह से खूब बात की और बच्चे और परिवार का हाल भी जान्। मनीष से मिलने वाले उसके सभी बैचमेट्स थाना प्रभारियों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि मनीष जल्द ही पूरी तरह से स्वस्थ होगा, उनका इलाज होगा और उसके बाद वह वापस अपनी नौकरी में लौट आएंगे।

गौरतलब है कि 10 नवंबर की रात मनीष कचरे में खाना तलाश रहा था उसी दौरान उनके बैचमेट रहे डीएसपी रत्नेश तोमर और विजय सिंह भदोरिया वहां से गुजरे। उन्होंने मनीष को ठंड से कांपते देख अपनी जैकेट दे दी। जब लौटने लगे तो मनीष ने DSP विजय सिंह भदोरिया को उनके नाम से पुकारा, तो साथी CSP रत्नेश तोमर हैरान रह गए। उन्होंने पूछा कि तुम इनका नाम कैसे जानते हो तो मनीष ने रत्नेश तोमर को भी नाम से पुकारा तो उनकी हैरानी और बढ़ गई, आखिर जब उन्होंने बात की तो खुलासा हुआ कि ये उनका साथी मनीष मिश्रा है।

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