झांसी के मध्यम परिवार में जन्मे हैदर अली कड़ी मेहनत व इच्छा शक्ति से कर रहे हैं नाम रोशन | New India Times

अरशद आब्दी/इरशाद आब्दी, झांसी (यूपी), NIT:

झांसी के मध्यम परिवार में जन्मे हैदर अली कड़ी मेहनत व इच्छा शक्ति से कर रहे हैं नाम रोशन | New India Times

झाँसी नगर के अन्दर उन्नवगेट चौकी अन्तर्गत मोहल्ला मेवतीपुरा में रहने वाले हैदर अली एक माध्यम परिवार से हैं, इनके पापा बचपन में ही कहीं खो गए थे। जब हैदर अली की उम्र क़रीब 12 वर्ष रही होगी तभी से हैदर अली ने अपनी माँ को सहारा देते हुए एक छोटी बहन जिसका नाम रोज़ी अली है उसकी पूरी परवरिश कर उसकी शादी की, वहीं देखा जाए तो हैदर अली ने अपने बचपन से ही समाज में संघर्ष कर आपने आप को आज ऐसे मुकाम पर ले आये हैं।

झांसी के मध्यम परिवार में जन्मे हैदर अली कड़ी मेहनत व इच्छा शक्ति से कर रहे हैं नाम रोशन | New India Times

आज हैदर अली बुंदेलखंडी फिल्मों के काम करते हैं। वहीं दूसरी तरफ देखा जाए तो हैदर अली एक समाजसेवी भी हैं जो कि 30 बार ग़रीबों, ज़रूरतमंदों को अपना ब्लड डोनेट कर चुके हैं जिसके लिए हैदर अली को कम उम्र में ही कई बार झाँसी ज़िलाअधिकारी एवं पूर्व मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरविंद वशिष्ठ, झाँसी जिला चिकित्सालय के सीएमओ ने कई बार हैदर अली को इस सराहनीय कार्य के चलते सम्मानित किया है। वहीं हैदर अली शायरी का भी काफ़ी शौक रखते हैं। उनकी किताब भी पब्लिक में आती है।

झांसी के मध्यम परिवार में जन्मे हैदर अली कड़ी मेहनत व इच्छा शक्ति से कर रहे हैं नाम रोशन | New India Times

जब हैदर अली से पूछा गया कि आप इतना ब्लड डोनेट करते हैं तो आपको कमज़ोरी महसूस नहीं होती है तो हैदर अली ने जवाब दिया कि नहीं कुछ कमज़ोरी नहीं होती है बल्कि मैं हर वक्त ज़रूरतमंद को ब्लड डोनेट करने को तैयार रहता हूं क्योंकि मैं ग़रीब हूँ, मैं किसी की पैसे से मदद नहीं कर सकता इसलिए अपना खून देकर लोगों की मदद करता हूं।

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रमज़ान के पूरे रोज़े रखते हुए भी हैदर अली अपने काम नहीं छोड़ते। बच्चों को ट्यूशन पढ़ा कर अपना और अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। वहीं कोरोना महामारी के बारे में हैदर अली ने चैनल के माध्यम से बताया कि सभी देश वासियों से अनुरोध है कि अपने अपने घरों में रहें, सोशल डिस्टेंस का पालन करें और कोरोना योद्धाओं का सम्मान करें। अंत में मोदी जी के श्लोक का प्रयोग करते हुए कहा दो ग़ज़ दूरी बहुत ज़रूरी।

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