मुंह पर काली पट्टी, गले में तख्तियां व हाथ बांधकर जताया सीएए-एनआरसी का विरोध, संविधान की रक्षा के लिये 22 महिलाओं ने रखा रोज़ा | New India Times

इम्तियाज़ चिश्ती, ब्यूरो चीफ, दमोह (मप्र), NIT:

मुंह पर काली पट्टी, गले में तख्तियां व हाथ बांधकर जताया सीएए-एनआरसी का विरोध, संविधान की रक्षा के लिये 22 महिलाओं ने रखा रोज़ा | New India Times

नागरिकता संशोधन कानून की आग अब पूरे देश में फैल चुकी है, सारे देश, हर प्रान्तों व शहरों से CAA, NRC के खिलाफ आवाज़ लगातार उठ रही है। विरोध प्रदर्शनों का भी दौर जारी है लेकिन अब हालात दिन व दिन बिगड़ते जा रहे हैं। विरोध की सीमाएं इस हद तक पहुँच चुकी हैं कि पर्दानशीन औरतों के सड़कों पर आना और अब प्रदर्शनकारी अपनी माँगों को मनवाने सरकार से तो गुहार लगा ही रहे हैं अब ये फांका करके भी विरोध पर उतर आए हैं।

मुंह पर काली पट्टी, गले में तख्तियां व हाथ बांधकर जताया सीएए-एनआरसी का विरोध, संविधान की रक्षा के लिये 22 महिलाओं ने रखा रोज़ा | New India Times

दमोह में बीते सप्ताह भर से नागतिकता कानून का विरोध जारी है। मुस्लिम महिलाओं के अलावा पुरुष वर्ग भी विरोध प्रदर्शन करता चला आ रहा है। अब प्रदर्शनकारी  मुस्लिम  महिलाएं धरना स्थल मुर्शिद बाबा मैदान में अपने मुँह पर काली पट्टी बांधकर गले में NRC, CAA  विरोधी स्लोगन लिखी तख्तियाँ डालें और हाथ बाँधे प्रदर्शन करते देखी गई तो वहीं 22 महिलाएं और लड़कियों ने  रोज़ा रखकर भी अपना विरोध जताया और खुदा से दुआ की  CAA, NRC से निजात मिल जाये। इसके लिए बाकायदा मुस्लिम महिलाओं ने दिन भर भूख और प्यास बर्दाश्त कर रोज़ा रखा और खुदा से दुआ की। संविधान बचाने के लिए मुर्शिद बाबा मैदान में प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में महिलाएं इकठ्ठा होतीं हैं और केन्द्र सरकार द्वारा लाये गये CAA, NRC का खुलकर विरोध करते हुए नारे बाज़ी करती हैं ताकि उनकी आवाज़ सरकार तक पहुँचे।

विरोध प्रदर्शन को मिला अन्य संगठनों का समर्थन

मुंह पर काली पट्टी, गले में तख्तियां व हाथ बांधकर जताया सीएए-एनआरसी का विरोध, संविधान की रक्षा के लिये 22 महिलाओं ने रखा रोज़ा | New India Times

मुर्शिद बाबा मैदान में चल रहे लगातार धरना प्रदर्शन में अब अन्य संगठनों के लोगों ने भी समर्थन दे दिया है। भीम आर्मी के कोमल अहिरवार एवं उनके साथियों के अलावा साहित्यिक व सामाजिक  संस्थाओं से जुड़ी  सुसंस्कृति परिहार,  साहित्यकार पंडित केशु तिवारी, नंद लाल सिंह परिहार, नितिन अग्रवाल, मानव बजाज, सहित अनेक  लोग पंडाल में पहुँचककर अपना समर्थन दे रहे है और महिलाओं द्वारा लगातार चलाये जा रहे आंदोलन की तारीफ करते हुए उनकी हौसलाअफजाई की।

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