बिजली कटौती से उपभोक्ता परेशान, छात्रों की पढ़ाई चौपट, उद्योग धंधे ठप, सरकारी कामकाजों पर बुरा प्रभाव | New India Times

गुलज़ार अहमद, मैनपुरी ( यूपी ), NIT; बिजली कटौती से उपभोक्ता परेशान, छात्रों की पढ़ाई चौपट, उद्योग धंधे ठप, सरकारी कामकाजों पर बुरा प्रभाव | New India Times​मैनपुरी जिले में पिछले पंद्रह दिनों से लगातार हो रही बिजली कटौती से आम उपभोक्ता परेशान हैं। पूरे दिन बिजली सप्लाई नहीं होने से आम जनजीवन प्रभावित हो रही है। बिजली नहीं आने से छात्रों की पढ़ाई, उद्योग धंधे एवं सरकारी कामकाज ठप्प पड़ गए हैं। 
भोगांव कस्बे सहित आस-पास के गांवों में पिछले कई दिनों से की जा रही अघोषित बिजली कटौती से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों द्वारा उच्चाधिकारियों से बार-बार शिकायत करने के बावजूद भी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। पिछले पंद्रह दिनों से कस्बे सहित ऊंचास्लामाबाद, रामनगर, भदेई, बंसरमऊ, तारिहा, बरिहा, हिरौली, बुढ़ौली, इलाबांस आदि ग्राम पंचायत क्षेत्र के तीन सौ से अधिक गांवों में अघोषित कटौती की जा रही है। क्षेत्र के ग्रामीणों ने बताया कि कई गांवों में पंद्रह दिनों में एक बार भी बिजली नही पहुंची है। कई गांवों में रात को 11 बजते ही बिजली गुल कर दी जाती है जो दूसरे दिन ही आती है। बिजली आने और जाने का कोई समय नही है, मात्र तीन से चार घंटे ही सप्लाई मिल पा रही है। 

बार-बार बिजली गुल होने, घंटों बिजली नहीं होने के कारण क्षेत्र के विद्यार्थियों को अध्ययन करने में भी परेशानी उठानी पड़ रही है। खास बात यह है कि बोर्ड की परीक्षाएं तो संपन्न हो गई पर स्नातक परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के लिए यह समय अहम है। इस समय बिजली नहीं होन पर विद्यार्थियों को ज्यादा परेशानी हो रही है। ​बिजली कटौती से उपभोक्ता परेशान, छात्रों की पढ़ाई चौपट, उद्योग धंधे ठप, सरकारी कामकाजों पर बुरा प्रभाव | New India Timesबिजली पर निर्भर लघु उद्योग चलाने वाले लोगों को भी परेशानी हो रही है। कई घंटों तक बिजली गुल रहने से व्यापार भी प्रभावित हो रहे हैं। आटा चक्की, वेल्डिंग के कारखाने, आरा मशीन सहित कई प्रकार के छोटे-मोटे बिजली से संचालित कार्य भी ठप पड़े हैं।

बिजली जाने के बाद यदि कोई जानकारी चाहिए हो तो पावर हाउस पर जाकर ही पता चलेगा क्योंकि विभाग द्वारा दिया गया सरकारी नंबर हमेशा बंद रहता है। वहां पहुंचकर जानकारी जुटाने पर भी कर्मचारी संतोषपूर्ण जबाब नहीं देते हैं। 

कुसमरा के 132 केवीए बिद्युत केंद्र के जेई बहुत कम केंद्र पर मौजूद रहते हैं जिसके कारण भी बिद्युत उपकेंद्र पर बिजली की सप्लाई नही मिल पाती है। 

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