अब्दुल वाहिद काकर, ब्यूरो चीफ धुले (महाराष्ट्र) NIT:

धुलिया में पहली बार 30वें सावरकर साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुध्दे ने किया। इस सम्मेलन में हिंदुत्व विचारधारा की शिक्षाओं से संबंधित संगोष्ठी, पैनल चर्चाएं, प्रदर्शनियां और सावरकर साहित्य, उनके के जीवन और काम पर व्याख्यान का आयोजन हुआ। इस दौरान केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने वीर सावरकर साहित्य सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वीर सावरकर ना केवल एक अभिजात देशभक्त थे बल्कि एक महान युगदृष्टा भी थे। सावरकर ने देश के करोड़ों लोगों के हृदय में उत्कृष्ट राष्ट्रभक्ति का दीप प्रज्वलित किया। और में गर्व से कहता हूँ कि उनमें से एक मैं भी हूँ।

इस दौरान मंच पर दिलीप करंबेकर, विनय सहस्त्रबुध्दे, मधुकर जाधव, चंद्रकांत सोनार, भिका जी इदाते उपस्थित रहे।
साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष दिलीप करंबेकर ने वीर स्वतंत्रता सेनानी सावरकर की जीवनी और उनके चरित्र के विभिन्न पहलुओं पर रोशनी डाली और बताया कि आज भी युवाओं को सावरकर के विचारों से प्रखर राष्ट्रवाद की प्रेरणा प्राप्त हो रही है। वीर सावरकर विश्व भर के क्रांतिकारियों में अद्वितीय थे। उनका नाम ही भारतीय क्रांतिकारियों के लिए उनका संदेश था। उनकी पुस्तकें क्रांतिकारियों के लिए गीता के समान थीं। उनका जीवन बहुआयामी था। वे एक महान क्रांतिकारी, इतिहासकार, समाज सुधारक, विचारक, चिंतक, साहित्यकार थे। उनका सम्पूर्ण जीवन स्वराज्य की प्राप्ति के लिए संघर्ष करते हुए बीता। आजीवन अखंड भारत के पक्षधर रहे। आजादी के माध्यमों के बारे में गांधी जी और सावरकर का नजरिया अलग-अलग था। दुनिया के वे ऐसे पहले कवि थे जिन्होंने अंडमान के एकांत कारावास में जेल की दीवारों पर कील और कोयले से कविताएं लिखीं और फिर उन्हें याद किया। इस प्रकार याद की हुई 10 हजार पंक्तियों को उन्होंने जेल से छूटने के बाद पुन: लिखा। जयोस्तू श्री महानमंगले जिसमें देशभक्ति की भावना कूटकूट कर भरा हुआ था।

अध्यक्ष भाषण को संबोधित करते हुए दिलीप ने कहा कि विनायक दामोदर सावरकर राष्ट्र की राजनीतिक विचारधारा हिन्दुत्व को विकसित करने का बहुत बडा श्रेय सावरकर को जाता है। वे न केवल स्वाधीनता-संग्राम के एक तेजस्वी सेनानी थे अपितु महान क्रान्तिकारी, चिन्तक, सिद्धहस्त लेखक, कवि, ओजस्वी वक्ता तथा दूरदर्शी राजनेता भी थे। उन्होंने परिवर्तित हिंदुओं के हिंदू धर्म को वापस लौटाने हेतु सतत प्रयास किये एवं आंदोलन चलाये। सावरकर ने भारत के एक सार के रूप में एक सामूहिक “हिंदू” पहचान बनाने के लिए हिंदुत्व का शब्द गढ़ा। उनके राजनीतिक दर्शन में उपयोगितावाद, तर्कवाद और सकारात्मकवाद, मानवतावाद और सार्वभौमिकता, व्यावहारिकता और यथार्थवाद के तत्व थे। सावरकर एक कट्टर तर्कसंगत व्यक्ति थे जो सभी धर्मों में रूढ़िवादी, साम्राज्यवाद, धर्मवाद विश्वासों का विरोध करते थे।
इस दो दिवसीय साहित्य सम्मेलन में प्रमुख वक्ता के रूप में पद्मा भान आचार्य राज्यपाल नागालैंड, डॉ अशोक मोडक, रविंद्र साठे किरण शेलार, प्रकाश एदलाबादकर, दिगपाल लांजेकर, अरविंद कुलकर्णी रहेंगे। वहीं पर कार्यक्रम के समापन समारोह के मुख्य अतिथि जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन तथा पर्यटन मंत्री जयकुमार रावल रहेंगे।
इस तरह की जानकारी कार्यक्रम के आयोजक स्वागत अध्यक्ष रवि बेलपाठक, संतोष अग्रवाल ने दी है।
