गणेश मौर्या, ब्यूरो चीफ, अंबेडकर नगर (यूपी), NIT:

शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर किए जाने वाले बड़े-बड़े दावे उस समय खोखले साबित होते नजर आते हैं, जब स्कूली बच्चों की जान जोखिम में डालकर उन्हें सफर करना पड़ता है। अंबेडकरनगर में आर.पी.आर.एन. पब्लिक स्कूल की बस से जुड़ी कुछ तस्वीरें इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई हैं। तस्वीरों में स्कूली बच्चे बस के दरवाजों और पायदान (फुटबोर्ड) पर लटककर यात्रा करते दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य न केवल चिंताजनक है, बल्कि स्कूल प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
अभिभावकों में नाराजगी, भारी फीस के बावजूद सुरक्षा भगवान भरोसे!
इस मामले को लेकर अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि स्कूल प्रबंधन अभिभावकों से बेहतर सुविधाओं और बच्चों की सुरक्षा के नाम पर भारी-भरकम फीस वसूलता है, लेकिन बच्चों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने में लापरवाही बरती जा रही है।
अभिभावकों का सवाल है कि यदि चलती बस से किसी बच्चे का पैर फिसल जाए और वह सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो जाए, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या स्कूल प्रबंधन किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही अपनी जिम्मेदारी समझेगा?
शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल
इस पूरे मामले ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूली वाहनों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर स्कूल बसों की जांच और सुरक्षा मानकों के पालन की निगरानी कौन कर रहा है?
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि संबंधित स्कूल की बसों की तत्काल जांच कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी बच्चे को क्षमता से अधिक संख्या में बस में बैठाकर या दरवाजे और पायदान पर लटकाकर यात्रा न कराई जाए।
प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
आर.पी.आर.एन. पब्लिक स्कूल की बस से सामने आई इन तस्वीरों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। अभिभावकों और जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन एवं बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) से मामले का संज्ञान लेकर जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
अब देखना यह होगा कि तस्वीरें सामने आने के बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग कब तक कार्रवाई करते हैं, या फिर बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा यह गंभीर मामला भी सरकारी फाइलों तक ही सीमित रह जाएगा?
बच्चों की सुरक्षा कोई विकल्प नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधन और प्रशासन की अनिवार्य जिम्मेदारी है।

