फर्जी वसीयतनामा, जाली नोटरी सील और कूटरचित सरकारी दस्तावेजों से जमीन हड़पने का आरोप, थाने में शिकायत; FIR दर्ज करने की मांग | New India Times

मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

फर्जी वसीयतनामा, जाली नोटरी सील और कूटरचित सरकारी दस्तावेजों से जमीन हड़पने का आरोप, थाने में शिकायत; FIR दर्ज करने की मांग | New India Times

जुन्नारदेव में जमीनों की खरीद-फरोख्त में फर्जीवाड़े के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। भोले-भाले ग्रामीणों को गुमराह कर उनके अधिकारों का हनन करते हुए लाखों-करोड़ों रुपये की जमीनें हथियाने के गंभीर मामले लगातार सामने आ रहे हैं। पूर्व में भी नगर में एक मृत महिला के नाम से रजिस्ट्री किए जाने का बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ था। इसी कड़ी में अब विकासखंड के ग्राम खैरवानी से एक ऐसा ही गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक संपत्ति को हड़पने के लिए आपराधिक षड्यंत्र रचकर फर्जी नोटरी सील, कूटरचित वसीयतनामा और जाली शासकीय एवं पुलिस दस्तावेज तैयार किए जाने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में प्रार्थी दिनेश यदुवंशी ने थाना प्रभारी, पुलिस थाना जुन्नारदेव को विस्तृत शिकायत आवेदन सौंपकर आरोपियों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने और कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

फर्जी वसीयतनामा, जाली नोटरी सील और कूटरचित सरकारी दस्तावेजों से जमीन हड़पने का आरोप, थाने में शिकायत; FIR दर्ज करने की मांग | New India Times

फर्जी वसीयत और राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी

प्रार्थी की माता का निधन 18 अप्रैल 2021 को हुआ था। आरोप है कि उनके निधन के बाद कुछ लोगों ने आपसी मिलीभगत कर पिछली तारीख का एक फर्जी वसीयतनामा तैयार किया। इसके आधार पर राजस्व विभाग को गुमराह किया गया और बिना किसी सार्वजनिक इश्तहार जारी किए तथा वैध वारिस (प्रार्थी) को सूचना दिए, कुछ ही दिनों के भीतर छलपूर्वक नामांतरण की प्रक्रिया पूरी करा ली गई। इसके बाद राजस्व अपील और सिविल वाद न्यायालय में लंबित होने के बावजूद अवैध रूप से विक्रय विलेख भी निष्पादित कर दिए गए।

नोटरी अधिवक्ता की सील और हस्ताक्षर का फर्जीवाड़ा

जब प्रार्थी ने वसीयतनामे की सत्यता की जांच संबंधित अधिकृत नोटरी अधिवक्ता से कराई, तो गंभीर अनियमितता सामने आई। नोटरी अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि उक्त वसीयतनामे पर न तो उनके हस्ताक्षर हैं और न ही उनकी अधिकृत पदमुद्रा (सील)। नोटरी द्वारा दिए गए सत्यापित शपथपत्र में भी यह स्पष्ट किया गया है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनके नाम की फर्जी सील और जाली हस्ताक्षर तैयार कर इस कथित षड्यंत्र को अंजाम दिया है।

न्यायालयीन प्रक्रिया में जाली साक्ष्यों के इस्तेमाल का आरोप

व्यवहार न्यायालय में विचाराधीन प्रकरण के दौरान न्यायालय को गुमराह करने के उद्देश्य से कई कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने का आरोप लगाया गया है।

शासकीय विद्यालय का फर्जी प्रमाण पत्र: मामले से जुड़े एक व्यक्ति पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का जाली प्रमाण पत्र तैयार करवाने का आरोप है। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी में विद्यालय के वर्तमान प्राचार्य ने स्पष्ट किया कि विद्यालय के रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण पत्र जारी किए जाने का उल्लेख नहीं है।

फर्जी पुलिस शिकायत पत्र: न्यायालय में एक कथित जाली पुलिस शिकायत पत्र भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें दर्शाया गया था कि मृतिका ने प्रार्थी के खिलाफ शिकायत की थी। एसडीओपी कार्यालय और थाना कार्यालय से RTI के माध्यम से प्राप्त रिकॉर्ड सत्यापन रिपोर्ट के अनुसार, ऐसी कोई शिकायत या मामला दर्ज होने का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

गवाहों के नाम पर जमीन का हस्तांतरण

इस पूरे प्रकरण में दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ और कथित फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायत के अनुसार, जमीन की खरीद-फरोख्त में जिन लोगों को गवाह बनाया गया, उनमें से प्रत्येक के नाम पर जमीन का कुछ न कुछ हिस्सा हस्तांतरित किया गया है। यह स्थिति कथित मिलीभगत और सुनियोजित धोखाधड़ी की आशंका को जन्म देती है। प्रार्थी ने शासन और संबंधित न्यायालय से मांग की है कि वसीयतनामे एवं रजिस्ट्री से जुड़े सभी गवाहों की भूमिका तथा संबंधित दस्तावेजों की निष्पक्ष और गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाए।

भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग

प्रार्थी द्वारा प्रस्तुत शिकायत आवेदन में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। इनमें प्रमुख रूप से निम्न धाराएं शामिल हैं:

  • धारा 318 – धोखाधड़ी
  • धारा 336 – कूटरचना
  • धारा 337 – न्यायालय या लोक रजिस्टर आदि से संबंधित अभिलेखों की कूटरचना
  • धारा 338 – मूल्यवान प्रतिभूति आदि की कूटरचना
  • धारा 340 – जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख का असली के रूप में उपयोग
  • धारा 227/228 – झूठे साक्ष्य और झूठे साक्ष्य गढ़ने से संबंधित प्रावधान
  • धारा 61(2) – आपराधिक षड्यंत्र

प्रार्थी दिनेश यदुवंशी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173 और 175 के तहत तत्काल FIR दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई, गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

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