ज़फ़र खान, अकोट/अकोला (महाराष्ट्र), NIT:
जिस पिता पर बेटे का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी होती है, उसी पिता ने शराब के नशे में अपने बेटे की हत्या कर दी। यह दर्दनाक वारदात मृतक की पत्नी यानी आरोपी की बहू की आंखों के सामने हुई थी। आखिरकार लंबे कानूनी संघर्ष के बाद पीड़ित बहू को न्याय मिला। अकोट के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने अपने ही बेटे की हत्या के दोषी पिता बालकृष्ण जानराव ठाकरे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
शराब के नशे में पिता ने बेटे की कर दी हत्या
मामला अकोट शहर के रामटेकपुरा स्थित नवदुर्ग नगर का है। 11 जनवरी 2024 की रात करीब 9 से 9:30 बजे के बीच आरोपी बालकृष्ण जानराव ठाकरे शराब के नशे में घर पहुंचा। इस दौरान घर में विवाद शुरू हो गया। आरोपी ने अपनी पत्नी मथुरा के साथ गाली-गलौज करते हुए उसे जान से मारने की धमकी दी।
जब बेटे धनंजय ठाकरे ने अपनी मां के साथ हो रहे दुर्व्यवहार का विरोध किया, तो आरोपी पिता ने जेब से धारदार छोटा चाकू निकालकर अपने ही बेटे के गले पर वार कर दिया। इस हमले में धनंजय ठाकरे की मौत हो गई। सबसे दर्दनाक बात यह रही कि पूरी घटना मृतक की पत्नी यानी आरोपी की बहू की आंखों के सामने हुई।
सरकारी वकील अजित देशमुख की प्रभावी पैरवी
इस गंभीर हत्याकांड में सरकार की ओर से सरकारी अधिवक्ता अजित देशमुख ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा। उन्होंने न्यायालय में कुल 10 गवाहों के बयान प्रस्तुत कराए। इनमें मृतक की पत्नी, चिकित्सा अधिकारी और जांच अधिकारी की गवाही बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई।
सरकारी अधिवक्ता अजित देशमुख ने घटना से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों को मजबूती से न्यायालय के समक्ष रखा। सजा के समय भी उन्होंने अपराध की गंभीरता पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने न्यायालय को बताया कि आरोपी ने अपनी ही बहू के सामने उसके पति और अपने बेटे की बेरहमी से हत्या की है। बहू के छोटे-छोटे बच्चे हैं और इस घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। ऐसे गंभीर अपराध में आरोपी के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए तथा उसे कठोर सजा दी जानी चाहिए।
सरकारी अधिवक्ता अजित देशमुख की प्रभावी पैरवी और मजबूत दलीलों ने मामले में न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।न्यायालय का फैसला, आरोपी को उम्रकैद
न्यायालय का फैसला, आरोपी को उम्रकैद
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 3 नवंबर 2026 को अकोट के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश माननीय श्री बी.एम. पाटील ने आरोपी बालकृष्ण जानराव ठाकरे (उम्र 67 वर्ष), निवासी रामटेकपुरा, अकोट को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
इसके साथ ही न्यायालय ने आरोपी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर छह महीने के सश्रम कारावास का अतिरिक्त आदेश दिया गया है। विशेष बात यह है कि जुर्माने की राशि वसूल होने पर उसे मृतक की पत्नी एवं शिकायतकर्ता को मुआवजे के रूप में देने का आदेश भी न्यायालय ने दिया है।
पुलिस अधिकारियों और पैरवी टीम की रही महत्वपूर्ण भूमिका
इस प्रकरण की प्रारंभिक जांच पुलिस उपनिरीक्षक राजेश जावरे और तत्कालीन थाना प्रभारी तपन कोल्हे ने की। इसके बाद अकोट विभाग के सहायक पुलिस अधीक्षक अनमोल मित्तल ने आगे की जांच पूरी कर आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
इस पूरे मामले में अकोला जिला पुलिस अधीक्षक अर्चित चांडक, अकोट उपविभागीय पुलिस अधिकारी निखिल पाटील तथा अकोट शहर थाना प्रभारी किशोर जुनगरे के मार्गदर्शन में पैरवी अधिकारी सहायक पुलिस उपनिरीक्षक प्रकाश जोशी और पुलिस कांस्टेबल अश्विन नवघरे ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
देर से मिला, लेकिन न्यायालय के फैसले से पीड़ित परिवार को मिला इंसाफ
कहते हैं कि देर से ही सही, लेकिन सच्चाई और सबूतों के आधार पर न्याय जरूर मिलता है। अकोट के इस हत्याकांड में सरकारी अधिवक्ता अजित देशमुख की प्रभावी पैरवी, गवाहों की महत्वपूर्ण गवाही और पुलिस विभाग की मेहनत से पीड़ित बहू को आखिरकार न्याय मिला।
न्यायालय का यह फैसला गंभीर अपराधों के प्रति कानून की सख्ती को दर्शाता है। जिस बहू की आंखों के सामने उसका संसार उजड़ गया था, उसे न्यायालय के फैसले से इंसाफ मिला है। अकोट सत्र न्यायालय के इस फैसले की क्षेत्र में चर्चा हो रही है।

