गौरझामर और अनंतपुरा में कथित झोलाछाप डॉक्टरों का मामला गरमाया, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल | New India Times

त्रिवेंद्र जाट, देवरी/सागर (मप्र), NIT:

गौरझामर और अनंतपुरा में कथित झोलाछाप डॉक्टरों का मामला गरमाया, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल | New India Times

सागर जिले की देवरी तहसील के गौरझामर और अनंतपुरा क्षेत्र में कथित झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा मरीजों का इलाज किए जाने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। गौरझामर में डॉ. टीके विश्वास एवं डॉ. अश्वनी मजूमदार तथा अनंतपुरा में डॉ. ललित राजोरिया के यहां बड़ी संख्या में मरीजों का उपचार किए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित क्लीनिकों में विभिन्न बीमारियों का इलाज करने का दावा किया जाता है और मरीजों को इंजेक्शन व बोतल चढ़ाकर उपचार दिया जाता है। मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग से जांच कर तीनों क्लीनिकों को सील करने की मांग की जा रही है।
स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार, इन कथित क्लीनिकों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में गरीब और जरूरतमंद मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। आरोप है कि उपचार के नाम पर मरीजों से हजारों रुपये तक वसूले जाते हैं तथा उन्हें हैवी डोज के इंजेक्शन और बोतल चढ़ाई जाती हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित चिकित्सकों की शैक्षणिक योग्यता, चिकित्सा पंजीयन और उपचार संबंधी गतिविधियों की आधिकारिक जांच आवश्यक है।

गौरझामर और अनंतपुरा में कथित झोलाछाप डॉक्टरों का मामला गरमाया, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल | New India Times

बताया जा रहा है कि इस मामले को लेकर समाचार पत्रों में लगातार खबरें प्रकाशित होने के साथ ही स्वास्थ्य मंत्री, सागर कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ), एसडीएम और देवरी बीएमओ तक शिकायतें पहुंचाई जा चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई सामने नहीं आने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
मामले में देवरी बीएमओ डॉ. पूजा परमार को पद से हटाए जाने तथा महाराजपुर शासकीय अस्पताल के डॉ. अमित रंजन त्रिपाठी को बीएमओ का अतिरिक्त प्रभार सौंपे जाने की जानकारी सामने आई थी। उस समय गौरझामर के दोनों कथित झोलाछाप डॉक्टरों और अनंतपुरा के संबंधित चिकित्सक के क्लीनिकों की जांच कर उन्हें सील करने तथा नियमानुसार कानूनी कार्रवाई किए जाने की बात कही गई थी। लेकिन शिकायतकर्ताओं का दावा है कि संबंधित स्थानों पर अब भी मरीजों का इलाज जारी है। ऐसे में सवाल उठता है कि कार्रवाई की तैयारी और आदेशों की चर्चा के बावजूद अब तक जमीनी स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
बीएमओ के प्रभार को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि डॉ. अमित रंजन त्रिपाठी को अतिरिक्त प्रभार सौंपे जाने के आदेश के बावजूद उन्हें अब तक विधिवत प्रभार नहीं मिला है। वहीं, डॉ. पूजा परमार को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजे जाने की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है। हालांकि, इन प्रशासनिक दावों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। स्वास्थ्य विभाग को इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए बताना चाहिए कि बीएमओ के प्रभार संबंधी आदेश पर कितना अमल हुआ है और यदि आदेश जारी हो चुका है तो उसके क्रियान्वयन में देरी क्यों हो रही है।

गौरझामर और अनंतपुरा में कथित झोलाछाप डॉक्टरों का मामला गरमाया, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल | New India Times

स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि संबंधित कथित झोलाछाप डॉक्टरों को किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त है। हालांकि, इस संबंध में फिलहाल कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है। ऐसे में प्रशासन से मांग की जा रही है कि किसी भी प्रकार के दबाव या प्रभाव से मुक्त होकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
सबसे अहम सवाल यह है कि जब स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक शिकायतें पहुंचने की बात कही जा रही है, तो अब तक जांच और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? यदि संबंधित व्यक्ति आवश्यक चिकित्सा योग्यता या पंजीयन के बिना मरीजों का उपचार कर रहे हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही नहीं पाए जाते हैं, तो विभाग को जांच के निष्कर्ष भी सार्वजनिक करने चाहिए।
गौरझामर और अनंतपुरा के इस मामले में अब स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से तीनों स्थानों की निष्पक्ष जांच कराने, संबंधित चिकित्सकों की योग्यता एवं पंजीयन की पुष्टि करने तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग उठ रही है। साथ ही बीएमओ के प्रभार संबंधी आदेशों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और जांच एवं कार्रवाई की समय-सीमा निर्धारित करने की भी मांग की जा रही है। अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस मामले में कब तक ठोस कदम उठाता है और शिकायतों पर कार्रवाई की वास्तविक स्थिति कब तक सामने आती है।

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