भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप पर दिए बयान को लेकर बागेश्वर सरकार ने दी सफाई, बोले- विनोद में कही बातों का अर्थ का अनर्थ न बनाएं | New India TimesOplus_131072

संदीप तिवारी, ब्यूरो चीफ, पन्ना (मप्र), NIT:

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप और उनकी त्रिभंगी मुद्रा को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि कथा-प्रवचन के दौरान सहज भाव और विनोद में कही गई बातों को गलत संदर्भ में प्रस्तुत कर उनका अर्थ का अनर्थ नहीं किया जाना चाहिए।
दरअसल, हाल ही में सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो अंश वायरल हुआ था, जिसमें वे भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना करते हुए सहज अंदाज में नजर आए थे। इस दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की त्रिभंगी मुद्रा यानी तीन स्थानों से शरीर को मोड़कर बांसुरी बजाने की मुद्रा का उल्लेख किया था। वीडियो सामने आने के बाद कुछ लोगों ने उनके बयान पर आपत्ति जताई थी।

इस संबंध में स्पष्टीकरण देते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि वे स्वयं भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त हैं। उनके नाम में भी कृष्ण जुड़ा हुआ है और वे श्रीमद्भागवत कथा एवं हरि चर्चा के माध्यम से सदैव ठाकुरजी की महिमा का गुणगान करते आए हैं। उन्होंने कहा कि जिससे सबसे अधिक प्रेम होता है, उससे ही कभी-कभी हंसी-मजाक और अपनत्व के भाव में उलाहना भी दिया जाता है। उनके कथन के पीछे भी प्रेम और भक्ति का यही भाव था।
उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि किसी भी संबोधन या प्रवचन के छोटे से अंश को काटकर उसका गलत अर्थ न निकाला जाए और न ही अधूरी वीडियो क्लिप के आधार पर भ्रम फैलाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके शब्दों से किसी कृष्ण भक्त की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वे विनम्रतापूर्वक क्षमा प्रार्थी हैं।
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म में भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण दोनों ही समान रूप से पूजनीय हैं। उनके अनुसार, कथा के दौरान विनोद में कही गई बातों को विवाद का विषय बनाने के बजाय उसके पीछे निहित प्रेम, श्रद्धा और भक्ति के भाव को समझना चाहिए।

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