संगठन को पांच साल देने वाले कार्यकर्ता को मिलेगा मौका या पूंजी-रसूख का चलेगा ज़ोर? सागर युवा मोर्चा अध्यक्ष पद की दौड़ में योगेश नामदेव की चर्चा तेज़ | New India Times

अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, सागर /भोपाल (मप्र), NIT:

संगठन को पांच साल देने वाले कार्यकर्ता को मिलेगा मौका या पूंजी-रसूख का चलेगा ज़ोर? सागर युवा मोर्चा अध्यक्ष पद की दौड़ में योगेश नामदेव की चर्चा तेज़ | New India Times

भारतीय जनता युवा मोर्चा के सागर जिला अध्यक्ष पद को लेकर दावेदारों के बीच चल रही चर्चाओं में अब योगेश नामदेव का नाम भी सामने आ रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व विस्तारक और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में विभिन्न दायित्व निभा चुके योगेश नामदेव की संगठनात्मक पृष्ठभूमि को उनकी संभावित दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, उनकी दावेदारी और नियुक्ति को लेकर पार्टी की ओर से अभी किसी आधिकारिक निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।

योगेश नामदेव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय वर्ष प्रशिक्षित कार्यकर्ता हैं। उन्होंने अपने संगठनात्मक जीवन की शुरुआत संघ से की और इसके बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। वे जिला तकनीकी प्रमुख, आंदोलन प्रभारी, जिला अभ्यास वर्ग प्रभारी और छात्रसंघ चुनाव प्रभारी के रूप में सक्रिय रहे। छात्रसंघ चुनावों के दौरान उन्होंने चुनावी गतिविधियों के संचालन और संगठनात्मक समन्वय में भूमिका निभाई। उनके समर्थकों का मानना है कि इन जिम्मेदारियों के माध्यम से उन्होंने खुरई सहित सागर जिले में विद्यार्थी परिषद को मजबूत बनाने का प्रयास किया।

पांच वर्ष पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में संगठन को दिया समय

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बताया जाता है कि योगेश नामदेव ने अपने जीवन के पांच वर्ष पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में संगठन को समर्पित किए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का द्वितीय वर्ष प्रशिक्षण और विभिन्न संगठनात्मक दायित्वों का अनुभव उनकी पृष्ठभूमि के महत्वपूर्ण पहलू हैं। ऐसे में युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष पद को लेकर उनकी चर्चा के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या भाजपा संगठन के लिए वर्षों तक समय देने वाले कार्यकर्ताओं के अनुभव और समर्पण को प्राथमिकता देगी या फिर आर्थिक संसाधनों और प्रभाव रखने वाले लोगों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी?

पारिवारिक पृष्ठभूमि भी संघ और विद्यार्थी परिषद से जुड़ी

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योगेश नामदेव की पारिवारिक पृष्ठभूमि भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ी रही है। संगठनात्मक गतिविधियों से पारिवारिक जुड़ाव के चलते उन्हें शुरुआती दौर से ही संगठन की कार्यप्रणाली को समझने और विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिला। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी उन्होंने संगठनात्मक कार्यों से अपना जुड़ाव बनाए रखा। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि के साथ संगठन में सक्रियता और जिम्मेदारियों के निर्वहन को उनकी कार्यशैली का अहम हिस्सा माना जाता है।

2017 के चित्रकूट उपचुनाव में भी निभाई भूमिका

योगेश नामदेव की संगठनात्मक सक्रियता का उल्लेख वर्ष 2017 के चित्रकूट विधानसभा उपचुनाव के संदर्भ में भी किया जाता है। इस दौरान उनकी सहभागिता को उनके राजनीतिक एवं संगठनात्मक अनुभव के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जाता है।

टीकमगढ़ विधानसभा के 2018 चुनाव में भी किया कार्य

वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान योगेश नामदेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के आह्वान पर टीकमगढ़ विधानसभा क्षेत्र में विस्तारक के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने भाजपा प्रत्याशी राकेश गिरी के पक्ष में चुनावी गतिविधियों में योगदान दिया। मतदान केंद्रों पर कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने और संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने में उनकी भूमिका रही।

इसके बाद वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने टीकमगढ़ विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के चुनावी अभियान के लिए समय दिया। चुनावी गतिविधियों में सहभागिता और संगठन के विभिन्न स्तरों पर कार्य करने के अनुभव को अब उनकी संभावित दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।

पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह के चुनाव में भी रहे सक्रिय

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पूर्व गृहमंत्री एवं खुरई विधानसभा क्षेत्र के विधायक भूपेंद्र सिंह से जुड़े चुनावी कार्यक्रमों में भी योगेश नामदेव की सक्रियता का उल्लेख किया जाता है। भूपेंद्र सिंह के चुनाव के दौरान उन्होंने युवा सम्मेलनों और प्रचार गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। युवाओं के बीच संपर्क स्थापित करने, चुनावी कार्यक्रमों में सहभागिता निभाने और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई।

खुरई विधानसभा क्षेत्र से जुड़ाव और स्थानीय स्तर पर युवाओं के बीच सक्रियता को भी उनकी संगठनात्मक पृष्ठभूमि का एक महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है। ऐसे में युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष पद को लेकर उनके नाम की चर्चा के बीच उनके पूर्व संगठनात्मक और चुनावी अनुभव का उल्लेख किया जा रहा है।

वीर अर्जुन सेना के माध्यम से युवाओं को जोड़ने का किया कार्य

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योगेश नामदेव की गतिविधियां केवल राजनीतिक और संगठनात्मक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही हैं। वीर अर्जुन सेना संगठन की स्थापना के साथ ही उन्होंने युवाओं को जोड़ने और सामाजिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में काम किया। संगठन के माध्यम से सागर जिले सहित प्रदेश के कई जिलों में युवाओं की टीम तैयार करने और उनसे संपर्क स्थापित करने के प्रयास किए गए।

वीर अर्जुन सेना के माध्यम से प्रदेश स्तर पर कुश्ती और कबड्डी जैसे खेलों को बढ़ावा देने तथा युवाओं को अखाड़ों से जोड़ने की दिशा में भी पहल की गई। पारंपरिक खेलों और अखाड़ा संस्कृति के प्रति युवाओं की रुचि बढ़ाने के प्रयासों को उनके सामाजिक कार्यों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

इसके अलावा सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक गतिविधियों में सहभागिता के साथ गौसेवा से जुड़े मुद्दों पर आंदोलनों के माध्यम से भी उन्होंने अपनी पहचान बनाने का प्रयास किया। समर्थकों के अनुसार, युवाओं के बीच संपर्क, संगठनात्मक नेटवर्क और विभिन्न गतिविधियों में भागीदारी उनकी कार्यशैली के प्रमुख पहलू रहे हैं।

संगठनात्मक अनुभव बनाम नए चेहरों पर दांव

सागर जिला युवा मोर्चा अध्यक्ष पद को लेकर चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि भाजपा अपना अगला जिला अध्यक्ष किन आधारों पर चुनेगी। एक ओर संगठन में लंबे समय तक काम करने वाले और जमीनी स्तर पर सक्रिय रहे कार्यकर्ता हैं, वहीं दूसरी ओर अन्य दावेदार भी अपनी सक्रियता और अनुभव के आधार पर जिम्मेदारी पाने की उम्मीद लगाए हुए हैं।

योगेश नामदेव का नाम चर्चा में आने के बाद उनके संघ प्रशिक्षण, विद्यार्थी परिषद में निभाई गई जिम्मेदारियों, छात्रसंघ चुनाव प्रभारी के अनुभव, इंजीनियरिंग की शिक्षा, चुनावी गतिविधियों में सहभागिता, पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह के चुनाव में सक्रियता और वीर अर्जुन सेना के माध्यम से युवाओं को जोड़ने के प्रयासों का उल्लेख किया जा रहा है।

पांच वर्ष तक पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में संगठन को समय देने वाले योगेश नामदेव की संभावित दावेदारी के बीच अब सबकी निगाहें पार्टी नेतृत्व के निर्णय पर टिकी हैं। क्या भाजपा संगठनात्मक अनुभव, सक्रियता और समर्पण को चयन का आधार बनाएगी या किसी अन्य दावेदार को जिम्मेदारी सौंपेगी? फिलहाल इसका जवाब पार्टी के आधिकारिक निर्णय के बाद ही सामने आएगा।

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